अनदेखी दौड़
जिसे देखो वो ही भाग रहा
अपनों से जुदा हो रहा
पर जा कहाँ रहा है
उसको खुद पता नहीं
आगे वाला दौड़ रहा है
बस उसके पीछे दौड़ा जा रहा है
उससे आगे निकलने की होड़
उसको दौड़ा रही
दौड़ते दौड़ते एक दिन
बीच मंज़िल में ही हांफ कर गिर जायेगा
अधूरी मंज़िल छोड़ फना हो जायेगा
