बाल गीत- मीठी बोली
कोयल की है मीठी बोली,
वाणी में जैसे मिश्री घोली।
मीठी बोली लगती प्यारी,
मन में मिठास की फुलवारी।
जादू जगाते मीठे बोल,
बढ़ाते हैं आपसी मेलजोल।
काँटों में भी जो मुस्काती,
मीठी बोली फूल खिलाती।
मीठी-सच्ची वाणी बोलो,
वैर का विष कभी न घोलो।
मीठी बोली है वरदान,
कड़वी बोली जहर समान।
मीठी बोली बोलो प्यारे,
वही जग-जीवन को संवारे।
नम्रता और मीठी बोली,
इनसे मीठी न कोई गोली।
— लीला तिवानी
