बाल कलाकारों की मासिक काव्य गोष्ठी

बाल मंच दक्षिण भारत इकाई की काव्य गोष्ठी संस्था के संस्थापक आदरणीय डॉ. नरेश नाज़ सर के सान्निध्य में 14 जून, रविवार शाम 4.30 बजे आयोजित की गई । इस काव्य गोष्ठी में दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल. तेलंगाना राज्यों से 19 बाल प्रतिभागियों ने बढ़ -चढ़कर भाग लिया और बहुत ही प्यारी-प्यारी कविताएँ सुनाईं । बाल काव्य गोष्ठी का प्रारम्भ सरस्वती वंदना से हुआ । माता शारदे का आह्वान कर सभी ने बारी-बारी से काव्य पाठ किया । गोष्ठी की अध्यक्षता और संचालन बाल मंच दक्षिण भारत इकाई की अध्यक्षा मोनिका डागा “आनंद” ने किया।
बाल प्रतिभागियों के नाम और उनकी कविताएँ इस प्रकार है –
विश्वंत साईं – उठो-उठो, शरद – आलपिन के सर होता पर, आयुष – ऊँचा खड़ा हिमालय, आकाश चूमता है,
माही – सॉंस-सॉंस सिमिरन करों, दक्षिणामूर्ति – पाँच पहर धंधे गया, तीन पहर गया सोय, पूजा श्री – दादी आई – दादी आई, लाड़ली कुमारी – चिड़िया रानी, प्रीतम कुमार – मायूस नहीं होना, गर्व डागा – मेरे पापा, विहान – जीवन नहीं मरा करता है, विराक – एक दो तीन चार, उत्कर्षा – चिड़िया रानी, निर्मोक्ष – मेरी अभिलाषा, वेदा – कवि और सम्राट, मीनाक्षी कृष्णा – भिक्षुक, रुद्राक्ष मनोचा – आ रही रवि की सवारी, आशी अग्रवाल – चल मर्दानी, चंद्रु – साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय और प्रतिक्षा – मैं गाँधी बन जाऊँगा बहुत सुंदर कविता पाठ किया ।
सभी बाल कलाकारों का उत्साह (मकाम दक्षिण प्रभारी) आदरणीया सरला सिंह ‘सरल’ जी ने बढाया और बहुत प्यारी कविता सुनाई “मेरे पापा” अंत में मोनिका डागा “आनंद” ने एक कविता ” बचपन की बेशकीमती सवारी ” सुनाई और धन्यवाद ज्ञापन के साथ सबको शुभकामनाएँ दी । बाल काव्य गोष्ठी सौहार्दपूर्ण वातावरण में बड़े उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हुई ।
