जीवन का खेला
जीवन का भी अजीब खेला है,
बस दो दिनों का मेला है।
सब माया मोह का जाल है,
सबका भ्रम में जीने से बुरा हाल है।
छोड़ो शिकवे शिकायत की पंचायत,
प्यार मोहब्बत से जीने की शुरु करो कवायद,
फिर पाओगे जीवन एक सुनहरा,
मानो मेरी ये बात, ये बात है बहुत गहरा।
जरा सोचो,आए थे जब खाली हांथ,
तो फिर क्या लेकर जाओगे साथ,
देकर जाओ अच्छे कर्मो की सौगात,
ताकि दुनिया याद करे तेरी बात।
— मृदुल शरण
