कविता

जीवन की जंग

जीवन की जंग लड़ता तन, पीड़ा से भरा हर श्वास,
फिर भी सभी को चाहिए, लक्ष्यों का विकास।

रिश्तों की थकान, दुनियादारी का बोझ अपार,
फिर भी उलझे जाते हैं, लिए कामों के भार।

भूल गए सभी शायद, इंसाँ कोई मशीन नहीं,
हर धड़कन की कीमत होती, कोई मामूली चीज नहीं।

उपलब्धियाँ तभी सार्थक हैं, जब संवेदना साथ चले,
कर्तव्य के संग मानवता भी, हर निर्णय में साथ मिले।

क्या लक्ष्य इतने आवश्यक हैं, कि पीड़ा भी अनदेखी हो जाए,
क्या व्यवस्था इतनी कठोर हो, कि करुणा ही खो जाए?

ऐसे क्षणों में ज़रूरत है, दुआ और प्यार की,
न कि हर दिन बढ़ती हुई, चिंताओं के बोझ की।

जीवन सबसे ऊपर है, यह बात समझनी होगी,
संवेदनाओं से ही व्यवस्था को, अब अपनी गरिमा गढ़नी होगी।

— मुनीष भाटिया

मुनीष भाटिया

जन्म स्थान : यमुनानगर (हरियाणा) उपलब्धियां: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख एवं कविताएँ I प्रकाशन: चार कविता संग्रह एवं तीन निबंध संग्रह, तीन quote बुक्स राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की दस हजार से अधिक पत्र पत्रिकाओं में वर्ष 1989 से निरंतर प्रकाशन I 5376, एरोसिटी, ऍफ़ ब्लाक, मोहाली -पंजाब M-7027120349 munishbhatia122@gmail.com

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