धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

शहीदाने कर्बला सिर्फ़ एक ऐतिहासिक घटना नहीं बल्कि एक शाश्वत विचारधारा है

नहरे फ़रात नहीं तुझ सा कोई बद नसीब,

साहिल पे तेरे प्यासा था कुनबा हुसैन का।

या हुसैन! कर्बला की घटना मानवता के इतिहास का वह महान और बेमिसाल अध्याय है जो दुनिया के अंत तक पीड़ितों के लिए हौसला और अत्याचारियों के ख़िलाफ़ प्रतिरोध का सबसे बड़ा प्रतीक रहेगा। कर्बला के मैदान में पैगंबर के नवासे हज़रत इमाम हुसैन और उनके बहत्तर जांनिसार साथियों ने सत्य और न्याय की ख़ातिर जो महान बलिदान पेश किया वह किसी विशेष धर्म या समूह तक सीमित नहीं बल्कि पूरी मानवता की साझी धरोहर है। कर्बला के शहीदों के बलिदान का मुख्य उद्देश्य सत्ता की लड़ाई नहीं था बल्कि इस्लाम धर्म की वास्तविक आत्मा को बचाना और यज़ीद की तानाशाही, ज़ुल्म और अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करना था। हज़रत इमाम हुसैन ने यज़ीद की अधीनता स्वीकार करने से इनकार करके यह साबित कर दिया कि सच्चा आस्तिक अपना सिर कटा सकता है लेकिन असत्य के सामने सिर झुका नहीं सकता। कर्बला के मैदान में एक तरफ हज़ारों की सेना का घमंड और सांसारिक शक्ति थी और दूसरी तरफ प्यासे, बेसहारा लेकिन ईमान की दौलत से भरपूर बहत्तर लोग थे। कर्बला के शहीदों के बलिदान इतने बहुआयामी हैं कि मानवीय बुद्धि दंग रह जाती है। छह महीने के मासूम बच्चे अली असग़र की प्यास और उनकी शहादत की मुस्कान ज़ुल्म की पराकाष्ठा और हुसैन के धैर्य का शिख़र थी। जवान बेटे अली अकबर के बलिदान ने इतिहास को हिलाकर रख दिया। फ़रात नदी के तट पर पहुंचकर भी पानी न पीना और वफ़ादारी की लाज रखना अब्बास अलमदार का वह कारनामा है जो सिर्फ़ कर्बला की ही विशेषता है। इन सब के बीच शहीदों के सरताज हज़रत इमाम हुसैन का महान धैर्य, उनका अंतिम सजदा और सत्य का संदेश बुलंद करना ब्रह्मांड का सबसे बड़ा जिहाद बन गया। कर्बला सिर्फ़ एक ऐतिहासिक घटना नहीं बल्कि एक शाश्वत विचारधारा है। यह हमें सिखाता है कि अन्याय के ख़िलाफ़ ख़ामोशी अपराध है और संख्या कितनी ही कम क्यों न हो सत्य पर अड़े रहना ही सफ़लता है। युद्ध की स्थिति में भी इमाम हुसैन के काफ़िले ने नैतिक और मानवीय मूल्यों को हाथ से जाने नहीं दिया। इंसान को बेदार तो हो लेने दो हर क़ौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन। कर्बला के शहीदों का निर्दोष ख़ून व्यर्थ नहीं गया। यज़ीद जीतकर भी हमेशा के लिए हार गया और हुसैन सिर कटाकर भी ब्रह्मांड के दिलों पर राज कर रहे हैं। आज दुनिया के हर कोने से या हुसैन की आवाज़ बुलंद होती है जो इस बात का सबूत है कि सत्य हमेशा जीवित रहता है और असत्य मिट जाने के लिए है। कर्बला के शहीदों को   लाखों सलाम।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़ 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

Leave a Reply