दोहा
शोक मना के कर दिया,पूरा अपना फर्ज।
बच्चे जो जलकर मरे,चढ़ा गये हैं कर्ज।।
कितनी सस्ती हो गई,अब बच्चों की जान।
भृष्टाचारी तन्त्र के,मिलते नहीं निशान।।
क्यों अवैध निर्माण को,कर देते मन्जूर।
साहब को किस बात का,वेतन दिया हुजूर।।
सही तरीके से नहीं,करता सिस्टम काम।
नियम कोई भी तोड़ दो,बस अच्छे दो दाम।।
आगजनी पर किस तरह,होगा वहाँ निकास।
भवन बनाने पर यही,एक बात है खास।।
— शालिनी शर्मा
