वक्त और रिश्ते
सुबह की नरम धूप जब आँगन में उतरती है,
चिड़ियों की चहचहाहट मन को छूकर गुजरती है।
एक प्याली चाय के साथ ख्याल यह आता है,
ज़िंदगी को हर पल क्यों? गंभीर बनाया जाता है।
यहाँ हर एक चेहरे पर मुस्कान सजी होती है,
वहाँ पर हर मुस्कान में सच्चाई मन में ही रोती है।
कुछ लोग मिल लेते हैं बस पथरीली राहों में,
पर उनके इरादों की गहराई नहीं होती निगाहों में।
हर किसी को दिल से लगाना ज़रूरी तो नहीं,
यहाँ हर बात को दिल पे लेना भी ज़रूरी तो नहीं।
कुछ रिश्ते वक्त के साथ चलने के लिए होते हैं,
हर एक रिश्ते उम्रभर निभाने के लिए नहीं होते हैं।
— संजय एम तराणेकर
