कविता

गाँव हृदयहीन नहीं होता

हृदयहीन
लोग नहीं होते,
पूरा गाँव नहीं होता।

ये तो होते हैं कुछ चालाक,
मतलबपरस्त,राजनीति के धूर्त,
जो अपनी खोपड़ी की योजनाओं
को देना चाहते हैं मूर्त रूप।

भले ही उसके लिए उजाड़ना पड़े
वहाँ की शांति,भाईचारा,
विश्वास और अटूट एकता,
जो है देश के हर गाँव की विशेषता।

गाँव, गाँव होता है,
जहाँ सरलता और निश्छलता स्वभाव होती है।
विवादों का निबटारा भी
अक्सर भाईचारे से हो जाता है।

न्याय इतना भी कठोर नहीं होता
कि लोग स्तब्ध रह जाएँ,
और न्याय को ही अन्याय कह जाएँ।
कुछ लोगों की व्यक्तिगत हवस
जब पूरे गाँव पर हावी हो जाती है,
तब हर रहवासी तनाव में आ जाता।
पर इससे पूरे गाँव का चरित्र
कभी कलुषित नहीं हो जाता।

गाँव की आत्मा आज भी
आपसी प्रेम और विश्वास में बसती है,
कुछ स्वार्थी चेहरों की काली छाया
पूरे गाँव की पहचान नहीं बनती है।

इसलिए दोष व्यक्तियों का लिखो,
गाँव की आत्मा को बदनाम मत करो,
जहाँ अब भी रिश्तों की गर्माहट जीवित है,
उसे हृदयहीन कहकर उसका सम्मान मत खोओ।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554