प्रभु कृपा
हे प्रभु कुछ ऐसी कृपा हो जाए
मन में अब केवल अच्छे विचार आएं
पर निन्दा से हम बचकर रहें सदा
और सत्य के मार्ग पर चलते जाएं ।
कौन क्या कहता है की फिक्र छूटे
अब कोई अपना हमसे जल्द न रूठे
यश-अपयश की चिंता न सताए
हे प्रभु कुछ ऐसी कृपा हो जाए ।
कटु शब्द अब और मुख से न निकलें
बात -बात पर मुई जुबान न फिसले
अंतर्मन हमारा निर्मल बन जाए
हे प्रभु कुछ ऐसी कृपा हो जाए ।
गहमागहमी होती है तो होने दें
जज़्बात को काबू में रखना सीखें
व्यर्थ के पचड़े में न पड़ जाएं
हे प्रभु कुछ ऐसी कृपा हो जाए।
सार्थक कार्यों में लगे समय अपना
टूटने न देना यह सुनहरा स्वप्ना
चालबाजियों से यह मन बाज आए
हे प्रभु कुछ ऐसी कृपा हो जाए ।
सुख-दुःख जीवन में आते जाते रहेंगे
साहस व धैर्य को आजमाते रहेंगे
यूं ही न मन विचलित हो जाए
हे प्रभु कुछ ऐसी कृपा हो जाए।
अब और संग्रह करने की इच्छा छूटे
करुणा, परोपकार भाव मन में फूटे
हो सके तो कुछ अच्छा कर जाएं
हे प्रभु कुछ ऐसी कृपा हो जाए ।
स्वार्थ और लालच से पीछा छूटे
दिखावटी पन का सारा जंजाल टूटे
आपके चरणों में मन रम जाए
हे प्रभु कुछ ऐसी कृपा हो जाए।
मोह माया में न भटके यह मन
सद्कार्यों में लगे, तन, मन और धन
जीवन व्यर्थ ही न निकल जाए
हे प्रभु कुछ ऐसी कृपा हो जाए ।
बार -बार न पड़े यहां आना -जाना
नैया भगवन हमारी तुम पार लगाना
काल को देख मन न घबराए
हे प्रभु कुछ ऐसी कृपा हो जाए ।
हे प्रभु कुछ ऐसी कृपा हो जाए
मन में अब केवल अच्छे विचार आएं
पर निन्दा से हम बचकर रहें सदा
और सत्य के मार्ग पर चलते जाएं।
— सुधा एवं नवल अग्रवाल
