भारोत्तोलक चानू को स्वर्ण
लोहे से उसने दोस्ती की, नव इतिहास लिख लाई।
भारत माँ की बेटी बन,स्वर्णिम गाथा पुनः दोहराई।
कंधों पर देश का सपना, आँखों में विश्वास अटल।
पल-पल तपकर निकली, बन साहस की मिसाल।
190 किलो वजन उठा, दुनिया को ये संदेश दिया।
मेहनत का पसीना आखिर, सोने जैसा देश किया।
तीसरी बार चैंपियन बन, गूँजाये भारत का सम्मान।
तिरंगा ऊँचा, शीश गर्वित, खिल उठा हैं हिन्दुस्तान।
चानू केवल खिलाड़ी नहीं, संघर्ष से सच्ची पहचान।
तुमसे सीखें नई पीढ़ियाँ, मेहनत ही है सबसे महान।
— संजय एम तराणेकर
