सामाजिक

चरित्र पर वार और सांप की फितरत 

हेडिंग में दिए गए ये सुनहरे और यथार्थवादी शब्द मानवीय रिश्तों, दोस्ती की नाज़ुकता और धोखे की कड़वी सच्चाई को बेहद प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करते हैं: “क़िरदार पर वार करने वालों को दोबारा दोस्त न बनाएं, सांप की रंगत बदल भी जाए तो रहता वह सांप ही है!” सामाजिक परिप्रेक्ष्य और महत्व के अंतर्गत, मानव जीवन में दोस्ती का रिश्ता सबसे पवित्र और भरोसेमंद रिश्ता माना जाता है, लेकिन जब यही रिश्ता भरोसे की डोर को तोड़ता है और इंसान के चरित्र पर गहरा आघात करता है, तो दिल का सुकून और विश्वास हमेशा के लिए डगमगा जाता है। विश्वास का क़त्ल यह है कि चरित्र पर वार करना केवल किसी का विरोध नहीं, बल्कि उसकी आत्मा और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने की एक घिनौनी साज़िश है, और जो व्यक्ति एक बार आपके भरोसे का ख़ून करे, उसके लिए दिल के दरवाज़े दोबारा खोलना मूर्खता के समान है। फ़ितरत कभी नहीं बदलती क्योंकि जिस तरह सांप की ज़हरीली फ़ितरत और उसकी आदत समय के साथ नहीं बदलती, चाहे वह कितने ही रूप क्यों न बदल ले, बिल्कुल उसी तरह कपटी और आस्तीन के सांप भी कभी अपनी स्वाभाविक ग़द्दारी से बाज़ नहीं आते। महत्वपूर्ण बिंदुओं का सारांश यह है कि  अपने क़रीबी दोस्तों और लोगों का चुनाव करते समय सावधान रहें और परखने में ज़ल्दबाज़ी न करें, जीवन में गलतियों की माफ़ी तो दी जा सकती है मगर चरित्र हनन और पीठ पीछे वार करने वालों को बार-बार मौक़ा देना ख़ुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने के बराबर है, और ऐसे लोगों से हमेशा के लिए दूरी बना लेना ही सबसे बेहतरीन रणनीति है जो दिखावे की दोस्ती और  भाईचारे की आड़ में अंदर से दुश्मनी पालते हैं। निष्कर्ष यही निकलता है कि जीवन में शांति और मानसिक सुकून के लिए ज़हरीले और चरित्र पर वार करने वाले लोगों से सतर्क रहना और उन्हें अपनी ज़िंदगी से हमेशा के लिए बाहर निकालना ही बुद्धिमानी है।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़ 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।