मौलिक दोहे
मन के सच्चे मित्र जो, छाया बनकर साथ।
धूप पड़े संसार की, थामे जीवन-हाथ॥
दौलत, शोहरत, नाम सब, पल में जाएँ खोय।
सच्ची यारी एक ही, जीवन भर की होय॥
आँसू जिनसे बाँटते, वही सखा अनमोल।
हँसी तो जग बाँट ले, दुख का कौन हमजो़ल॥
रिश्ते कागज़ हो गए, मतलब की है रीत।
मित्र वही जो दर्द में, लिख दे मन की प्रीत॥
वक्त नदी-सा बह गया, बदले लाखों रंग।
सच्चा यार न बदले, चाहे टूटे अंग॥
अहंकार की आग में, जलते देखे गाँव।
प्रेम बचाए हर धरा, मित्र बने जब छाँव॥
मीठे बोलों से बड़ा, जग में नहीं प्रसाद।
कटु वचन पल में करें, वर्षों का बरबाद॥
जीवन इक पुस्तक बड़ी, हर दिन नया अध्याय।
प्रेम, दया, विश्वास से, सुंदर हो हर पाय॥
यादों की इस भीड़ में, कुछ चेहरे भगवान।
जिनसे जीना सीखकर, पाया अपना मान॥
नाम न पत्थर पर लिखो, लिख दो सबके प्राण।
मरकर भी जो याद हो, वही सच्चा इंसान॥
— धर्मेन्द्र शर्मा
