मौलिक दोहे
मन के सच्चे मित्र जो, छाया बनकर साथ।धूप पड़े संसार की, थामे जीवन-हाथ॥ दौलत, शोहरत, नाम सब, पल में जाएँ
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Read Moreप्रथम अध्याय — “जब हमारा संसार बस एक आँगन था” सूरज की पहली किरण अभी धरती पर पूरी तरह उतरी
Read Moreदिल्ली के जंतर-मंतर की सड़क पर आज सिर्फ लाठियों और आंसुओं के निशान नहीं हैं, बल्कि वहां देश की आने
Read Moreकॉलेज का पहला दिन आज भी याद है। नए चेहरे, नई कक्षाएँ और दिल में अनगिनत सपने। शुरुआत में सब
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