हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : मोबाईल का कहर, मचा रखी ग़दर

सर्वत्र व्याप्त मोबाईल और उसका रोना है। यह एक ऐसा है यंत्र, जिसने कर दिया इंसान को मुग्धमंत्र? ठेठ हिंदी में बोले तो चलित दूरभाष, टीव्ही यंत्र, कान में नर-नारियों के ऐसा फूंका मंत्र की सर्व व्यापी हो गया मोबाईल यंत्र, हिल गया सारे जहां का तंत्र? इंसान को बना दिया मिट्टी का लौंदा, भरतपुरी लोटा बिन पैंदा, निष्क्रियता, आलसपन देकर बना दिया भौंदा, कोने में पटक दिया मांदा, कर दिया औंधा, बना दिया पागल कर दिया सौंधा? मोबाईल ने मनुष्य को बाइल (उबाल) कर धर दिया।
बच्चें, लुच्चे, उचक्के, भले मानुस, उठाईगिरे, बेईरा मानस, लुगाय्यां, बई, भद्र महिलाएं चारों दिशाएं इस मोबाईल की गिरफ्त में है। ढोर चराने वाला ग्वाला, मंदरूप का लाला, बोंदर का साला, गोरा हो या काला, गरीब या पैसेवाला, सब इस मशीन के पीछे बैंडे, पागल है। यह सर्वत्र व्याप्त होकर हल्ला मचा रहा है। शायद यमलोक में भी? लोगों का वश नही चल रहा है वरना वें यमराज से भी कॉल कर बतिया लेते? मोबाईल बेतार का तार है, किंतु मनुष्यों के रिश्ते कर दिए तार-तार है? इस रजीक से यंत्र से कभी इंसान उबलता, कभी ठंडागार हो जाता। ये बैठे आदमी को गतिशील तथा सक्रिय मानुस को जड़ कर सकता है।
आज मोबाईल सर्वस्व है, छाया हुआ जग में उसका वर्चस्व है। आज पत्नी और मोबाईल, स्मार्ट है। जब बीबी बाहर जाए तो भी आपका समय सहजता, सूकूँ से कट जाएं, ये सबको अति भाए। हम भोजन भक्षण करना भूल जाये किंतु तुम्हे चार्ज करना नही, ये आल इन वन है, एकदम एवन है। समस्त कार्य संपादित, संचालित, हो रहे इस मोबाईल से, बस संतान उतपति नही? मोबाईल अनन्त, इसकी कथा अनन्ता, तुझ में अच्छाई, बुराई दोनो व्याप्त है। गांव का पारकया, ग्वाला पोर्न से बिगड़ रहा है तो शहर का लाला व्यापारिक ट्रिक सीख रहा। रील बनाने में नरी लुगाई उघाड़ी तो नरे छोरे निपट रहे है। कैमरे, घड़ी, कैलकुलेटर, सिनेमा, टोर्च, डायरी, कैलेंडर, डाकघर, वाले सब इसके नाम पर रो रहे है।
मोबाईल, मासूका, पत्नी से प्यारा हो गया है, आदत बन चुका है। तालाब में जैसे, सब इसमे डूबे रहते है? बीबी जान प्रिय, मोबाइल प्राणप्रिय हो गया है। इसे जेब मे, उन्हें साथ मे कैब में रखना पड़ता है। मोबाईल में लॉक, किंतु बीबी बे-लॉक होती है। बेखौफ होती है। मोबाईल जादुई चिराग है तो पत्नी प्रेम राग है। इसने सबको गुलाम बना दिया है। चौकोर, चमकीली खिड़की में दुनिया सिमट गई है। पहले पड़ोसी, रिश्तेदारों का हालचाल पूछते थे अब खुद बेहाल है? इंसान गर्दन झुकाए, कोने में बैठा अपनी मस्ती में अलमस्त है? खाली समय, चैन, सूकूँ छीन लिया इसने। मोबाईल बैट्री फुल पर इंसान ऊर्जा रहित रहता है। मोबाइल तार रहित है और उसने मनुष्य के सारे तार काट दिए हैं। प्यार, मोहब्बत, संवेदनशीलता , स्नेह, अपनत्व के वायर कट चुके है। दुर्घटनाओं पर लोग मदद कम करते है लेकिन वीडियोग्राफी ज्यादा करते है। मोबाईल ने कइयों को चश्मे चढ़वा दिए हैं। कई इसके चक्कर में फैल होकर सो नही पा रहे है। अनिंद्रा रोगी हो गए है। मोबाईल का कहना है कि वो आपका बचपन छीन , आपकी जवानी चुरा रहा है। आप जल्द बूढ़ा जाएंगे, इसलिए मेरा इस्तेमाल सोच समझकर करें।
दोस्तों मेरे फायदे है तो भारी नुकसान भी है। या तो कर लो दुनिया मुट्ठी में या तुम हो जाओ मेरी गुटटी में? यदि ज्यादा मेरे चाले में पड़े तो बच्चों मैं तुम्हारे पास खेलने-कूदने का समय भी न छोडूंगा, न आपके पास कसरत का भी टेम नही रहेगा। आपकी कार्यक्षमता आधी, व आलस्य क्षमता दुगनी कर दूंगा। आप काम कम, मुझे ज्यादा देखेंगे। मेरा उपयोग सावधानी से करना, मैं आपको उन लोगों से दूर कर दूंगा जो आपके बहुत करीब, सन्निकट है। ज्यो-ज्यो आपको मेरी लत लग जायेगी, त्यों-त्यों मैं आप पर हावी होता जाऊंगा। मैं मोबाईल वल्द सोशल नेटवर्किंग, पहले आपकीं आंख खराब कर दूंगा फिर आपकीं नींद चुरा लूंगा, धीरे-धीरे आपका स्वास्थ्य खराब कर दूंगा। मैं आपको पूरी तरह से निठल्ला, कामचोर, गोबर गणेश, गमन्या शंकर बना दूंगा फिर आपको कुछ नहीं सूझेगा और आप ढूंढे से गुनमथान बैठे रहेंगे। माध्या प्रसाद की तरह?
कुनगासा के भेरू काका मोबाईल की सार इस प्रकार बताते है कि वह यंत्र, जिससे बात करो तो अपना मुंडा दुख जाए पर मोब का कुछ ना हो, बात की चीर फाड़ करने वाली छोटी मशीन, भेजा काटने, चाटने वाला यंत्र, व्यक्ति में अहम भरने वाला, बाद में लटकेल मुंडा कर देने वाला , इंसान की ऊर्जा बिगाड़क यंत्र , माथा चढाऊँ स्मार्ट फोन जो आपके कान, आंख, भेजा पका दें, वो मोबाईल, जो इंसान को हर पल गति में रखें और उसकी सदगति कर दें, उसकी मति तिरभिन्नाट कर दें, कान खड़े, जुबान आड़ी कर दें, वो हस्त चलित, तार रहित, भार रहित, मनोरंजन सहित यंत्र मोबाईल।

— दिनेश गंगराड़े

दिनेश गंगराड़े

निपानिया, इंदौर, मप्र

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