गीत/नवगीत

अच्छे मित्र

यूं ही नही दिल से दिल मिलते हैं
अच्छे मित्र मुश्किल से मिलते हैं।

बड़ी-बड़ी बातें तो बहुत करते
लेकिन बात का मान नही धरते
पीठ पीछे करते आपकी बुराई
खुद करते अपनी जग में हंसाई।

ऐसे लोग शीघ्र दिल से उतरते हैं
अच्छे दोस्त मुश्किल से मिलते हैं।

सुख में तो सब साथ खड़े हो जाते
और आपकी हां में हां मिलाते
मुसीबत देख जो पीठ दिखाते
और नित्य नये-नये बहाने बनाते।

खुद अपनी निगाहों में वे गिरते हैं
अच्छे मित्र मुश्किल से मिलते हैं।

बहुत मिलेंगे नसीहत देने वाले
बात-बात पर मजा लेने वाले
मुश्किल घड़ी में जो साथ निभाए
कंधे से कंधा मिला खड़ा हो जाए

जिन्हें छूकर मन कमल खिलते हैं
अच्छे मित्र मुश्किल से मिलते हैं

बिना मांगे भी अपनी राय दे डालते
आपको मुश्किलों से उबारते
मिलकर सफलता का मनाते जश्न
दोस्ती निभाने का करते हर प्रयत्न

मन के जज्बात जो बखूबी पढ़ते हैं
ऐसे दोस्त मुश्किल से मिलते हैं।

जब छाया हो हर तरफ अंधियारा
तत्काल जो बन जाते सहारा
आस- विश्वास की लौ जलाकर
जीवन में भर देते उजियारा।

कभी-कभी स्वयं कष्ट से घिरते हैं
अच्छे मित्र मुश्किल से मिलते हैं।

ठीक हो जाएगा,का विश्वास भरते
ढांढ़स का हाथ , कंधे पर धरते
होगा कल फिर एक नया सवेरा
दूर हो जाएगा फिर सारा अंधेरा।

नव उत्साह का जो संचार करते हैं
अच्छे मित्र मुश्किल से मिलते हैं।

अच्छे मित्रों को संभाल कर रखिये
कमियों को थोड़ा नजरंदाज करिये
बेशकीमती हैं वह साथ गुज़रे पल
अक्सर दिल में मचाते रहते हलचल

उदास चेहरों पर मुस्कान भरते हैं
अच्छे मित्र मुश्किल से मिलते हैं।

चलो ईश्वर को दोस्त बनाएं
और खुशनुमा ज़िन्दगी बिताएं
दूर हो जाएंगे फिर सारे झमेले
आप कभी न फिर पड़ेंगे अकेले।

जल्दी कहां ऐसे विचार उभरते हैं
अच्छे मित्र मुश्किल से मिलते हैं।

यूं ही नहीं दिल से दिल मिलते हैं
अच्छे मित्र मुश्किल से मिलते हैं।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई

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