डॉल्फ़िन शो
विद्यालय का वार्षिक उत्सव समाप्त हुआ और के.जी. में पढ़ने वाली नन्ही मिनी भागकर मीनाक्षी के गले आ लगी।
“मम्मी! भूख लग रही है। बहुत निन्नी (नींद) आ रही है। आप कहाँ थीं? मुझे जल्दी से लेने क्यों नहीं आईं?” आदि-आदि। उसके प्रश्न थे कि समाप्त ही न हो रहे थे।
“मुख्य अतिथि के लम्बे उद्बोधन के कारण बच्चे तैयार हो, बैठे-बैठे परेशान हो गए थे। कितनों ने कॉस्ट्यूम भी गंदे कर लिए। बड़ी मुश्किल से इन्हें समझाया है, सँभाला है और नृत्य करवाया है। एक महीने के अभ्यास पर पानी फिर जाता।” मिनी का हाथ मीनाक्षी के हाथ में थमाते हुए अध्यापिका ने अपनी तकलीफ़ तुरंत बताई।
“सफल कार्यक्रम की बधाई आपको।” नींद से बोझिल झूमती-झूलती मिनी को गोदी में उठाती हुई वह कह उठी।
“मम्मी चलो न!” मिनी आँखें मलते हुए बोली।
उसका बदन भी तपता हुआ लगा मीनाक्षी को।
रंग-बिरंगा सुसज्जित विशाल मंच, पर्दों पर बने मेल खाते आलेख, शानदार सभागार, जगमगाती-नाचती बिजलियाँ, आलीशान सोफ़े और कुर्सियाँ, संगीत-तंत्र के उपकरण, क्लोन के जैसे नाचते-गाते यंत्रचालित से मासूम बच्चे; सभी विद्यालय की शान में चार चाँद लगा रहे थे।
“मम्मी! कल तो छुट्टी है न? हम दुबई डोल्फ़िनेरियम जा रहे हैं न? आपने प्रोमिस किया था कि एनुअल फंक्शन के बाद लेकर चलोगी। पापा टिकट ले आए हैं न?” कहते हुए मिनी का सिर मीनाक्षी के कंधे पर ही लुढ़क गया।
‘इस लड़की ने देर से बोलना, देर से चलना शुरु किया था तब मैं परेशान थी कि कब चलेगी, कब बोलेगी और अब सोचना पड़ता है कि कब रुकेगी और चुप होगी।’ कंधे पर निढाल सोती हुई मिनी को लेकर वह कार में बैठ गई।
अगले दिन वादे के मुताबिक मिनी को दुबई क्रीक पार्क में बने डॉल्फ़िनेरियम में ‘डॉल्फ़िन शो’ ले जाया गया। ताल से ताल मिला उछलती, छल्ले से गुज़रती, बॉल से खेलती, सलाई पकड़ स्वेटर बुनती, तमाम करतब दिखाती डॉल्फ़िनों की प्रशंसा में मीनाक्षी और नीलेश नए से नए उपमान गढ़ रहे थे कि वहीं मिनी एकदम शांत बैठी थी। मीनाक्षी को आश्चर्य हुआ कि कैंची-सी कतरनी जबान में आज कैसे ब्रेक लग गया। शायद थकान के कारण…
“देखो मिनी बेटा! ये डॉल्फ़िन कितना बढ़िया शो कर रही हैं न! कल तुम्हारे स्कूल में हुए शो जैसा ही।” मीनाक्षी ने मिनी का ध्यान आकर्षित करना चाहा।
“मम्मी! क्या इनको भी इनकी टीचर ने दिनभर टिफ़िन नहीं खाने दिया होगा, बाथरूम नहीं जाने दिया होगा, खेलने नहीं दिया होगा? क्या ये भी भूखी होंगी, इन्हें भी निन्नी आ रही होगी? क्या इन्हें भी बुखार होगा?”
— डॉ. आरती लोकेश गोयल
