शशिधर-श्याम एक तत्व
जगत-नियंता एक हैं, चाहे भिन्न हों नाम,
देते हैं संदेश सभी हमें, प्रेम है सुख का धाम,
शशिधर-श्याम एक तत्व, चाहे भिन्न स्वरूप,
जगत-कल्याण के हित दोनों ही को प्रणाम।
मस्तक पर शशि-धारी शिवजी शांत रूप हैं,
सदैव समाधि में निरत रहने वाले अनूप हैं,
अधरों पर वंशी-धारी श्याम प्रेम के आगार,
निष्काम-निर्लिप्त प्रेम के छांव और धूप।
एक हैं कैलाशी-अविनाशी, एक द्वारकाधीश,
दोनों ही महायोगी हैं और दोनों ही अवनीश,
एक शांत रूप हैं, समय पर बन जाते प्रचंड,
एक बजाते बांसुरी और महाभारत करते जगदीश।
शशिधर हो या श्याम, संदेश दोनों का एक ही भाव,
मन में शांति, हृदय में प्रेम और जीवन में रहे सद्भाव,
रूप अनेक प्रभु के हों, पर भाव बदलने न पाए,
साँस-साँस में सिमरन हो और मधुर रहे स्वभाव।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
