कविता

शशिधर-श्याम एक तत्व

जगत-नियंता एक हैं, चाहे भिन्न हों नाम,
देते हैं संदेश सभी हमें, प्रेम है सुख का धाम,
शशिधर-श्याम एक तत्व, चाहे भिन्न स्वरूप,
जगत-कल्याण के हित दोनों ही को प्रणाम।

मस्तक पर शशि-धारी शिवजी शांत रूप हैं,
सदैव समाधि में निरत रहने वाले अनूप हैं,
अधरों पर वंशी-धारी श्याम प्रेम के आगार,
निष्काम-निर्लिप्त प्रेम के छांव और धूप।

एक हैं कैलाशी-अविनाशी, एक द्वारकाधीश,
दोनों ही महायोगी हैं और दोनों ही अवनीश,
एक शांत रूप हैं, समय पर बन जाते प्रचंड,
एक बजाते बांसुरी और महाभारत करते जगदीश।

शशिधर हो या श्याम, संदेश दोनों का एक ही भाव,
मन में शांति, हृदय में प्रेम और जीवन में रहे सद्भाव,
रूप अनेक प्रभु के हों, पर भाव बदलने न पाए,
साँस-साँस में सिमरन हो और मधुर रहे स्वभाव।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244