ग़ज़ल
विधा- ग़ज़ल
गुनगुनाती बूंद सावन की सदा है,
हम समझे तेरी पाज़ेब की अदा है।
शजर की गुनगुनाहट जो सुनी,
देखा तो पूरा घुंधरुओं से लदा है।
रोशनी की आहट हुई यकायक,
समझे थे किस्मत में तिमिर बदा है।
चाँदनी में भी एहसास तेरा ही दिखा,
बारिश तो बस बूँदों की ही गदा है।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
