गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

विधा- ग़ज़ल

गुनगुनाती बूंद सावन की सदा है,
हम समझे तेरी पाज़ेब की अदा है।

शजर की गुनगुनाहट जो सुनी,
देखा तो पूरा घुंधरुओं से लदा है।

रोशनी की आहट हुई यकायक,
समझे थे किस्मत में तिमिर बदा है।

चाँदनी में भी एहसास तेरा ही दिखा,
बारिश तो बस बूँदों की ही गदा है।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244