बाल कविता

बरखा रानी

विधा- गीत
शीर्षक- बरखा रानी

बरखा रानी आएगी,
ढेरों खुशियां लाएगी,
रिमझिम-रिमझिम बूंदों से
गीत सुरीला गाएगी।

भीग-भीग पेड़ों के पत्ते,
और हरे हो जाएंगे,
ताल-तलैया जल से भरेंगे,
हम झूमेंगे-नाचेंगे।

खिल जाएं मुरझाए चेहरे,
किसान के मुख पर लाली,
कागज की नावें तैरेंगी जब,
बच्चे खुश हो बजाएंगे ताली।

वन-उपवन झूमेंगे कहेंगे,
बरखा रानी बड़ी सयानी,
कम या ज्यादा बरस-बरस कर,
मत करना तू मनमानी।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244