महर्षि दधीचि का अतुलनीय त्याग
सतयुग काल में महातपोबली, शिव भक्त महर्षि दधीचि ने संसार के लिए कल्याण व त्याग की भावना रख, वृत्तासुर का नाश करने के लिए अपनी अस्थियों का दान कर बड़े ही सम्मानित व पूजनीय तो हुवे ही साथ ही सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में सर्वोच्च दानवीर के रूप में उनका नाम लिया जाता है।
महर्षि दधीचि को अपनी अस्थियों का दान करने की आवश्यकता क्यों पड़ी के जबाब में जान लें की एक महाबली वृत्रासुर देवराज इन्द्र को मारना चाहता था और इन्द्र के पास ऐसा कोई अस्त्र नहीं था जिससे उसकी हत्या की जा सके। इसलिये ब्रह्मादेव ने वृत्तासुर को मारने के लिए वज्र बनाने के लिए देवराज इन्द्र को तपोबली महर्षि दधीचि के पास उनकी हड्डियाँ माँगने के लिये भेजा।
इस तरह महर्षि दधीचि द्वारा दान की गयी हड्डियों से वज्र बना और वृत्रासुर मारा गया। और सारी मानव जाती का कल्याण हुआ।
— गोवर्द्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’
