मुक्तक/दोहा

राखी: स्नेह की पावन डोर

राखी का ये पर्व है, प्रेम भरा त्योहार।
भाई-बहन के स्नेह से, महके सारा संसार॥

जिनके भाई हैं नहीं, बहनें हों न उदास।
दिल से अपना मानकर, दूँगा भाई का प्यार॥

दुनिया की हर बेटियाँ, बहना मेरी जान।
स्नेह-सम्मान से जोड़कर, रखूँ उनका मान॥

भाई का रिश्ता खून का, केवल होता नाय।
जहाँ मिले सच्चा स्नेह, रिश्ता वहीं बन जाय॥

भाई बिना बहनों को, कभी न हो मलाल।
मैं हूँ सबका अपना भाई, रखूँ सदा ख्याल॥

राखी केवल धागा नहीं, प्रेम-स्नेह की डोर।
दिल से जो बँध जाए कभी, टूटे न वह छोर॥

बहना तुम मुस्कान हो, भाई तुम्हारी आस।
रक्षा का ये पावन वचन, रहे सदा विश्वास॥

— रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com