गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

किया प्यार तुझसे बता कर निभाना।
चलो जीत लें मुस्कुरा कर ज़माना।।

दिया दर्द तुमने अभी सह रहे हैं।
लगाया निशाना दिखा कर ज़माना।।

सुनी क्या कभी तो भरी आह हमने।
हमें देख ले आज़मा कर ज़माना।

नहीं लख सके चाहत ही हमारी।
खुशी में खिला है सता कर ज़माना।।

अभी देख परवाह हम तो करें क्यों।
हमें देख ले अब हटा कर ज़माना।।

— रवि रश्मि ‘अनुभूति’

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