गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

टूटे हुए सपनों को फिर से सजाना है।
दुनिया में तुझे ऊंचा रुतबा बनाना है।।

जुगनू की तरह बनकर रहना नहीं यहां।
दिनकर की तरह तुझको बनकर दिखाना है।।

जीवन में कभी काला अंधियार जब घिरे।
तुझको बुझे दीपक को फिर से जलाना है।।

कोना कोई धरती का बंजर न रहे अब।
बीजों को बचा के तुझे जंगल उगाना है।।

बच्चा न किसी घर में रोता हुआ मिले।
रोते हुए बच्चों को तुझको हंसाना है।।

गलियों में फैले न कहीं नफरत की आग अब।
हर दिल से नफरतों को तुझको मिटाना है।।

नारी का न करे कोई अपमान अब यहां।
गंदी नजर से बेटी को हर पल बचाना है।।

हर घर बने खुशहाल और हंसते रहे सभी।
आंसू सभी के पोंछ के खुशियों को लाना है।।

— शालिनी शर्मा

शालिनी शर्मा

पिता का नाम-स्वर्गीय मथुरा प्रसाद दीक्षित माता का नाम -श्रीमती ममता दीक्षित पति का नाम-श्री अनिल कुमार शर्मा वर्तमान स्थायी पता- केऐ-16 कर्पूरी पुरम गाजियाबाद फोन न0- 9871631138 जन्म एंव जन्म स्थान-09.04.1969, परीक्षित गढ़ गाजियाबाद उप्र शिक्षा एवं व्यवसाय-बीएससी बीएड़,अध्यापिका व सहायक NCC आफिसर (13 यूपी गर्ल्स बटालियन) प्रकाशित रचनाएं एवं विवरण-अमर उजाला काव्य में 48 रचनायें प्रकाशित, विभिन्न पत्रिकाओं में रोज रजनाएं प्रकाशित होती हैं,दो तीन सम्मान प्राप्त