बाल कविता

बाल दोहे

सूरज निकला भोर में, फैली सुंदर धूप।
चिड़िया बैठी डाल पर, लेकर मीठा रूप।।

मम्मी देती प्यार से, गरम-गरम पकवान।
खाकर हम तो खेलते, तन-मन बने बलवान।।

पढ़-लिखकर हम बनें, अच्छे नेक इंसान।
मेहनत से ऊँचा करें, अपना हिंदुस्तान।।

पेड़ लगाएँ मिल सभी, हरियाली हो पास।
शुद्ध हवा जब हम पिएँ, तन में भरता श्वास।।

मिल-जुलकर हम खेलते, रखते सबका मान।
हँसता-गाता बचपन ही, जीवन की मुस्कान।।

झूठ कभी हम बोलते, सदा बोलते सत्य।
सच्चाई की राह पर, मिलता सच्चा नित्य।।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh