बाल दोहे
सूरज निकला भोर में, फैली सुंदर धूप।
चिड़िया बैठी डाल पर, लेकर मीठा रूप।।
मम्मी देती प्यार से, गरम-गरम पकवान।
खाकर हम तो खेलते, तन-मन बने बलवान।।
पढ़-लिखकर हम बनें, अच्छे नेक इंसान।
मेहनत से ऊँचा करें, अपना हिंदुस्तान।।
पेड़ लगाएँ मिल सभी, हरियाली हो पास।
शुद्ध हवा जब हम पिएँ, तन में भरता श्वास।।
मिल-जुलकर हम खेलते, रखते सबका मान।
हँसता-गाता बचपन ही, जीवन की मुस्कान।।
झूठ कभी हम बोलते, सदा बोलते सत्य।
सच्चाई की राह पर, मिलता सच्चा नित्य।।
— डॉ. प्रियंका सौरभ
