धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

चंचल मन

“मन रे तू काहे न मेरी बात सुने…” यह उक्ति केवल एक काव्य पंक्ति नहीं, बल्कि मानव चेतना की सबसे बड़ी चुनौती और सत्य को रेखांकित करती है। मनुष्य मन अत्यंत चंचल, अस्थिर और असीम इच्छाओं का केंद्र है। वह भूतकाल की स्मृतियों में भटकता है या भविष्य की आशंकाओं से घिर जाता है, लेकिन वर्तमान के क्षण में टिकना उसके लिए सबसे कठिन होता है।
मन की चंचलता, स्वभाव और स्वरूप,
भगवद्गीता में अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा था कि “मन अत्यंत चंचल, प्रमथनशील और दृढ़ है, इसे वश में करना हवा को बाँधने जैसा दुष्कर है।” मन का स्वभाव जल की तरह है,जैसे बहता जल छोटी सी बाधा से भी मार्ग बदल लेता है, वैसे ही मन हर नए विचार, इच्छा और भय के साथ बहने लगता है।
मन की इस अस्थिरता के मुख्य कारण हैं,
अपेक्षाएँ और चिंताएँ, जीवन में तुरंत परिणाम पाने की होड़ और अनिश्चितता का भय।
इंद्रियों का आकर्षण, बाहरी आकर्षण मन को लगातार भटकाते रहते हैं।
सहनशीलता की कमी,थोड़ी सी भी विपत्ति या विलंब में धैर्य खो देना।
धीर धरना (धैर्य) क्यों आवश्यक है?
धीरज या धैर्य कोई कमजोरी नहीं, बल्कि मानसिक शक्ति का प्रतीक है। जब मन अधीर होता है, तब व्यक्ति जल्दबाज़ी में ग़लत निर्णय लेता है, जिससे तनाव और असफ़लता मिलती है।
“धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।।” — संत कबीर
संत कबीर का यह दोहा समझाता है कि समय से पहले और भाग्य से अधिक कभी किसी को कुछ नहीं मिलता। सही समय आने पर ही प्रयास रंग लाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मौसम आने पर ही पेड़ में फल लगते हैं।
चंचल मन को शांत और संतुलित करने के उपाय
अभ्यास और वैराग्य,निरंतर आत्म-निरीक्षण और निरर्थक विचारों से दूरी बनाना।
ध्यान और प्राणायाम,श्वास पर ध्यान केंद्रित करने से मन की गति धीमी होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
सकारात्मक चिंतन,निराशाजनक परिस्थितियों में भी धैर्यपूर्वक समाधान खोजने की आदत डालना।
स्वीकार्यता,जो चीज़ें हमारे नियंत्रण में नहीं हैं, उन्हें सहर्ष स्वीकार करना सीखना।
मन को बलपूर्वक रोकना कठिन है, लेकिन प्रेम, सजगता और धैर्य के साथ इसे सही दिशा में मोड़ा जा सकता है। जीवन के हर पथ पर धीर धरकर चलना ही मानसिक शांति और सफलता की कुंजी है।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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