ग़ज़ल
नहीं कोई है, बस तुम हो, तुम्हीं से यार करते हैं
बतायें तुमको कैसे, तुमसे कितना प्यार करते हैं
सुकूँ तुमसे है दिल को, ज़िन्दगी का दुःख उठाने में
मिलो ना तुम, तो छुपछुप कर ही बस दीदार करते हैं
किसी से भी मिलें बेशक़, तुम्हारा ज़िक्र आता है
कोई हो बात, तुमको साहिब-ए-किरदार करते हैं
भक्ति तुमसे है हमको, ज़रूरत भी तुम्हारी है
तुम्हारी ही शिकायत तुमसे ही सरकार करते हैं
चलो छोड़ो, बताएँ अपना हाल-ए-दिल तुम्हें अब क्या
हैं तन्हा, अपना जीना ही चलो दुश्वार करते हैं
न मानो तुम, तो ये तुम पे ही छोड़ा ‘गीत’ हमने है
है माना तुमको अपना, हम तो ये स्वीकार करते है
— प्रियंका अवस्थी ‘गीत’
