भजन/भावगीत

मुस्कुरा रही मातारानी (राधेश्यामी छंद)

नौ दुर्गा का अवतार लिए, मुस्कुरा रही मातारानी,
धूम मची है नवरात्रों में, गज सवार श्री मातु भवानी ।

इन शारदीय नवरात्रों में, अंबे मॉं को भक्त मनाएं,
शुद्ध भाव से नौ स्वरूपों की, नित ही सुंदर महिमा गाएं,
नौ दिन श्रद्धा से विधिवत् ही, नौ रूपों का ध्यान लगाएं,
फल-फूल और नैवेद्य कई, माता को प्रेम से धराएं,
नौ रूपों में करें श्रृंगार, चक्रों पर विराजित भवानी,
नौ दुर्गा का अवतार लिए, मुस्कुरा रही मातारानी ।

मातु शैलपुत्री दे स्थिरता, ब्रह्मचारिणी तप की दीक्षा,
चंद्रघंटा निडरता दे दो , कुष्मांडा गूढ़ प्रेम शिक्षा,
मन विशुद्ध स्कंदमाता करो, कात्यायनी सुगम्य परीक्षा,
कालरात्रि चेतना जगा दो, महागौरी करूणा प्रशिक्षा,
दीजिए सिद्धिदात्री अंतस, ज्ञानार्जन सिद्धि की निशानी,
नौ दुर्गा का अवतार लिए, मुस्कुरा रही मातारानी ।

करती है माता भक्तों की, दुष्कर संकट से रखवाली,
है तीनों लोकों में मेरी, मॉं की महिमा बड़ी निराली,
हरती अंधेरा तन-मन का, पल में सारा ज्योतावाली,
सबके जीवन में लाती है, सुख “आनंद” अमिय खुशहाली,
बंद सौभाग्य के सभी द्वार, खोले आदिशक्ति महारानी,
नौ दुर्गा काअवतार लिए, मुस्कुरा रही मातारानी ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु

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