व्यंग्य – ये कैसे शातिर, खाली गया तीर
अखबार की खबर पढ़कर मन में एक गंभीर सवाल उठता है-आखिर ये कैसे शातिर डकैत हैं, जो पेट्रोल पंप पर डकैती डालने की योजना बनाते-बनाते ही पुलिस के हत्थे चढ़ जाते हैं? डकैती की योजना इतनी गोपनीय थी कि शायद उन्होंने उसका एजेंडा बनाकर बैठक में पढ़ा होगा- “आज की मीटिंग का विषय: पेट्रोल पंप लूटने की तैयारी।” हमारे देश की पुलिस भी धन्य है। डकैती हुई नहीं, पेट्रोल पंप लुटा नहीं, कैश बॉक्स खुला नहीं और पुलिस ने पहले ही पाँच शातिरों को दबोच लिया। यानी पुलिस ने अपराध को होने से पहले ही पकड़ लिया। इसे कहते हैं- ‘अपराध रोकथाम का एडवांस वर्जन।’
शायद बदमाशों ने सोचा होगा कि पहले जगह का निरीक्षण कर लेते हैं। कौन-सा पेट्रोल पंप सुविधाजनक है, कितनी रकम मिल सकती है, भागने का रास्ता क्या होगा-इन सब पर गंभीर ही नहीं गहन चिंतन चल रहा होगा। तभी पुलिस ने उनकी चिंतन-सभा में अचानक प्रवेश कर दिया। अब बेचारे बदमाशों की हालत ऐसी होगी कि वे सोच रहे होंगे- “डकैती डालने का तो मौका मिला नहीं, ऊपर से पुलिस ने हमारी मीटिंग भी रद्द कर दी! यह कोई ऐसी ही मीटिंग थोड़ी थी जिसकी परमिशन ली जाए”
सच, आजकल अपराध करना भी आसान नहीं रहा। पहले अपराधी योजना बनाते थे, फिर अपराध करते थे और पुलिस बाद में जांच करती थी। सब कुछ निपटने के बाद में ही पुलिस की एंट्री होती थी। फिर कुत्ते को कपड़ा वगैरह सुंघाने का काम डॉग एक्सपर्ट को सौंप दिया जाता था। फिर जिसके यहां चोरी या डकैती हुई है वह डॉग एक्सपर्ट के कुत्तों को देखते ही बड़ा संतुष्ट हो जाता था, उसे आशा बंध जाती थी कि मेरी चोरी चली गई हुई चीज जरूर वापस मिलेंगी। अब व्यवस्था इतनी आधुनिक हो गई है कि अपराधी योजना बनाता है और पुलिस पहले ही उसका ‘प्रोजेक्ट’ बंद कर देती है।
लेकिन इस खबर का सबसे मजेदार पहलू यह है कि डकैतों की योजना पुलिस से ज्यादा उनके अपने लोगों को पता थी। आखिर सूचना पुलिस तक पहुँची कैसे? लगता है अपराधियों ने भी सोशल मीडिया की तर्ज पर अपनी योजना का प्रचार-प्रसार कर दिया होगा। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर पूछा होगा- “क्या चल रहा है?” बदमाश बोले होंगे- “कुछ नहीं साहब, बस पेट्रोल पंप के बारे में चर्चा कर रहे थे।” पुलिस ने कहा होगा- “अच्छा! तो हथियार, गाड़ी और लूट की योजना भी इसी चर्चा का हिस्सा है?”
बस फिर क्या था-‘चर्चा’ सीधे गिरफ्तारी में बदल गई। वैसे पुलिस के लिए यह खबर उपलब्धि है और बदमाशों के लिए सीख-डकैती डालने से पहले कम-से-कम अपनी योजना को ‘गोपनीय’ रखना सीखो! क्योंकि आज के दौर में अपराध करना जितना मुश्किल है, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है अपराध की योजना को पुलिस से बचाकर रखना।और पेट्रोल पंप वालों के लिए तो यह खबर राहत की है-पंप पर पेट्रोल भले महंगा हो गया हो, लेकिन फिलहाल डकैतों का ‘प्लान’ जरूर सस्ता पड़ गया!
— संजय एम तराणेकर
