कविता

।। पुरानी यादें ।।

वो दिन भी कितने अजीब थे
जब हम तेरे करीब थे ।
ना किसी को पाने की जिद थी
ना किसी को खोने का डर था ।
बस हम उम्र हाइट थी और मस्ती भरी फाइट थी ।
वह जल्दी स्कूल जाकर अंताक्षरी खेलना,
और कभी-कभार छुट्टी करके गार्डन में टहेलना ।
वह दोस्तों के लिए मॉनिटर से भिडना,
फिर सेलिब्रेशन के टाइम उन्हें छेड़ना ।
स्ट्रीक टीचर की बाते ना मानना,
और फ्रेंड्स के साथ रिसेस से पहले टिफिन खाना ।
वह सारे दोस्तों की मेरे प्रति यारी,
और मेरे साथ ना होने
वह सवेरे- सवेरे जबरदस्ती का नहान
और कभी-कभी तबीयत खराब का बहाना ।
वह दो चोटी के लिए ड्रामा करना,
और सर के पीट-पीछे कारनामें करना ।
वह एग्जाम की टेंशन, और पेरेंट्स मीटिंग में पापा की अग्रेशन ।
वह सारे दोस्तों की मेरे प्रति यारी,
और आज साथ ना होने की खुद्दारी ।
पर याद आते रहेंगे वह हसीन पल,क्योंकि जैसा भी था ।
खूबसूरत था हमारा गुजरा हुआ कल ।

— एकता धोगालिया

पारमिता षड़ंगी

ओड़िआ साहित्य जगत म एक सुपरिचित नाम । वह अपनी आँचलिकता में सशक्त स्त्री-कथाकार एवं कवयित्री ही नहीं, कुशल ओड़िआ भाषानुवादक भी हैं। नारी मनस्तत्व की विश्लेषण, सूक्ष्म अवबोध की अन्वेषण तथा एक बलिष्ठ कहानी के आधार उनकी कहानियों को अलग परिचय देते हैं। जीवनवादी कहानीकार होते हुए भी पारमिता की कविताएँ चेतना और मानसिकता को खूब प्रभावित करती हैं। हिन्दी और ओड़िआ भाषा में कहानी, कविता लेखन में उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। अब तक उनकी 7 कहानी-संग्रह 5 कविता-संग्रह और 11 अनुवाद-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। पारमिता की रचनाएँ वागर्थ, आजकल, समकालीन भारतीय साहित्य, भाषा ,नूतन कहानियाँ, देशज, देशधारा, विश्वगाथा, कृति बहुमत, माटी ,कथाक्रम, कथारंग, अंतरंग, पाठ, युगवार्त , परिंदा, व्यंजना आदि अनेक सुप्रसिद्ध पत्रिका में प्रकाशित हुई होने के साथ साथ भारत के विभिन्न क्षेत्रों और विदेश में भी प्रकाशित हुई हैं। उनकी रचनाओं का बंगाली, राजस्थानी, मैथिली ,पंजाबी, गुजराती, मराठी, तमिल, ओड़िआ और इंग्लिश भाषा में अनुवाद किया गया है। पारमिता को उनके कहानी-संग्रह 'संबित के पास जब मैं नहीं थी' के लिए महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी की तरफ से पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मुम्बई मो -9867113113

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