राजनीति

देश का सौभाग्य है मोदी सरकार

पिछले दिनों यूरोप के कई देशों जैसे फ्रांस, इटली, अल्बानिया, बेल्जियम आदि से उपद्रव, लूटपाट, आगजनी और हिंसा के जो समाचार और वीडियो आये हैं, वे हम भारतवासियों की आँखें खोल देनेवाले हैं। इन देशों में उपद्रव करने वाले लोग वही हैं जिनको यूरोप के देशों ने शरणार्थियों के रूप में शरण दी थी और जो आज जेन-जी के नाम पर ये सब उत्पात कर रहे हैं।

पिछले दिनों भारत में भी इसी तथाकथित जेन-जी के नाम पर काकरोच जनता पार्टी के रूप में ऐसे ही उपद्रव करने का पूरा प्रयास किया था, लेकिन हमारी केन्द्रीय सरकार की तत्परता और सुरक्षा बलों के सदुपयोग के कारण वह संकट टल गया। तिलचट्टों का वह जघन्य षड्यन्त्र अपनी मौत स्वयं मर गया और आज वे जेल से बचने के लिए पुलिस और अदालत के सामने नाक रगड़ रहे हैं।

यह हमारे देश का परम सौभाग्य है कि आज हमारे पास पूज्य मोदी जी के नेतृत्व में ऐसी सुदृढ़ और विश्वसनीय सरकार है जिसके भरोसे हम चैन की नींद सो सकते हैं। यूरोप के बहुत से नागरिक भी आज यह सोचने को विवश हो गये हैं कि यदि उनके पास भी मोदी जी जैसा कोई नेता होता, तो उनको यह उत्पात और विध्वंश न झेलना पड़ता।

— डॉ. विजय कुमार सिंघल
आश्विन शु. 11, सं. 2083 वि. (22 अक्टूबर, 2026)

डॉ. विजय कुमार सिंघल

नाम - डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’ जन्म तिथि - 27 अक्तूबर, 1959 जन्म स्थान - गाँव - दघेंटा, विकास खंड - बल्देव, जिला - मथुरा (उ.प्र.) पिता - स्व. श्री छेदा लाल अग्रवाल माता - स्व. श्रीमती शीला देवी पितामह - स्व. श्री चिन्तामणि जी सिंघल ज्येष्ठ पितामह - स्व. स्वामी शंकरानन्द सरस्वती जी महाराज शिक्षा - एम.स्टेट., एम.फिल. (कम्प्यूटर विज्ञान), सीएआईआईबी पुरस्कार - जापान के एक सरकारी संस्थान द्वारा कम्प्यूटरीकरण विषय पर आयोजित विश्व-स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में विजयी होने पर पुरस्कार ग्रहण करने हेतु जापान यात्रा, जहाँ गोल्ड कप द्वारा सम्मानित। इसके अतिरिक्त अनेक निबंध प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। आजीविका - इलाहाबाद बैंक, डीआरएस, मंडलीय कार्यालय, लखनऊ में मुख्य प्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) के पद से अवकाशप्राप्त। लेखन - कम्प्यूटर से सम्बंधित विषयों पर 80 पुस्तकें लिखित, जिनमें से 75 प्रकाशित। अन्य प्रकाशित पुस्तकें- वैदिक गीता, सरस भजन संग्रह, स्वास्थ्य रहस्य। अनेक लेख, कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य, कार्टून आदि यत्र-तत्र प्रकाशित। महाभारत पर आधारित लघु उपन्यास ‘शान्तिदूत’ वेबसाइट पर प्रकाशित। आत्मकथा - प्रथम भाग (मुर्गे की तीसरी टाँग), द्वितीय भाग (दो नम्बर का आदमी) एवं तृतीय भाग (एक नजर पीछे की ओर) प्रकाशित। आत्मकथा का चतुर्थ भाग (महाशून्य की ओर) प्रकाशनाधीन। प्रकाशन- वेब पत्रिका ‘जय विजय’ मासिक का नियमित सम्पादन एवं प्रकाशन, वेबसाइट- www.jayvijay.co, ई-मेल: jayvijaymail@gmail.com, प्राकृतिक चिकित्सक एवं योगाचार्य सम्पर्क सूत्र - 15, सरयू विहार फेज 2, निकट बसन्त विहार, कमला नगर, आगरा-282005 (उप्र), मो. 9919997596, ई-मेल- vijayks@rediffmail.com, vijaysinghal27@gmail.com

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