कोशिश करते हैं
चलो कोशिश करते हैं,
आंख मूंदने की,
नींद ढूंढने की,
कि शायद आ जाये,
दया दिखा जाये,
क्योंकि अपनी हरकतों से
इसे गंवा चुका हूं,
कर्ज़ बढ़ा चुका हूं,
ऊपर से जिगर के टुकड़ों को
वैवाहिक उम्र में पहुंचा चुका हूं,
अपनी कमर झुका चुका हूं,
और हां देशहित मानकर
तीन तीन कोविड टीका लगवा चुका हूं,
तो चलो कोशिश करते हैं
पूरी उम्र तक जिंदा रहने की,
जिल्लत और ताने सहने की,
मुंह से उफ्फ तक न कहने की,
हर आहट पर चौक सहमने की,
कभी कर लिये कोशिश
निश्चित नींद बुलाने की,
थोड़ी बहुत पी जाने की,
वो तो वैसे भी जलजला आ जाता है,
घर में भुखमरी छा जाता है,
मेरी दिलेरी पर दाद दो दोस्तों,
दाल,रोटी,भात दो दोस्तों,
कर ही तो रहा हूं कोशिश जिंदा रहने की,
अपनी बातें,अपने जज्बात जता
लिखकर कुछ कहने की।
— राजेन्द्र लाहिरी
