कुण्डली/छंद

कलरव मधुर विहंग का, साध रहा सुर ताल।

आम्र मंजिरी से लदी, अमराई में डाल।।

अमराई में डाल, महकती मन फुलवारी। 

कोयल का सुन गान, मुग्ध हैं दुनिया सारी।।

झर-झर झरता नेह, साज हैं सुन्दर अभिनव।

अनुपम सुर संगीत, मधुर लागे खग कलरव।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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