कविता

लाड़ली

हमें बच्चियों को,
मुस्कान देना चाहिए।
यहां हर दिन,
उत्सव सा माहौल,
रखना चाहिए।
यहीं हमारी बेटियों को,
सम्मान मिलेंगी।
सात आसमान पर पहुंचने का,
आधार बनेंगी।
ज़िन्दगी के दौर में,
यह एक सुंदर सलीका है।
यहीं बेटियों को उन्नत करने का,
खुबसूरत तरीका है।
यहां सुख और शांति से विचार जरूरी है।
बेटियों को लाडली बनाएं रखने के लिए,
आज़ हम सब की,
बन चुकी मजबूरी है।
यहीं प्रयास बेटियों को,
सम्मान दिलाएगी।
जीवन के हर रंग में,
उन्नत पहचान बनाएंगी।
आओ हम-सब मिलकर,
बेटियों की मुस्कान का,
उत्सव मनाएं।
लाड़ली लक्ष्मी उत्सव में,
सम्पूर्णता का रंग बिछाएं।
— डॉ. अशोक

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com