वो आकृति
एक माधव नाम का लड़का था।माधव उसकी माँ और पिता सभी जयपुर में रहते थे।माधव के पिता का संगमरमर का व्यापार था और वह काफी बड़े व्यापारी थे। वह चाहते थे कि उसका बेटा देश के विभिन्न शहरों में उनके व्यापार को फैलाये।
एक दिन माधव की माँ ने सोचा कि अब वो माधव को अपने पिता के व्यापार को संभालने के लिए बोलेगी।जैसे ही वह उसके कमरे में गई उसने देखा कि उसका बेटा किसी की तस्वीर बना रहा है।उसने कहा क्या कर रहे हो माधव जब देखो किसी की तस्वीर बनाते रहते हो, कभी किसी की आँख, किसी के होंठ, किसी की चोटी? बेटा कौन है?
इन बेकार की बातों से कुछ हासिल नहीं होगा। माधव ने कहा यह हमें नहीं पता किसकी आँखें हैं माँ। एक लड़की की आकृति आती है मेरी आँखों में लेकिन उसका चेहरा स्पष्ट नहीं दिखाई पड़ता। कभी आँख दिखता है,कभी होंठ दिखता है, कभी पीछे से वह जाती हुई नजर आती है।मैं खुद परेशान हूँ कि क्या है, किसकी आकृति मेरी आँखों में आती है,और कौन है, जिसकी तस्वीर हमसे खुद बन जाती है।
माधव की माँ काफी गुस्सा हो गई और अपने बेटे से बोली कि कल सुबह तुम्हें बिजनेस के सिलसिले में नैनीताल जाना है और वहाँ अपने व्यवसाय के लिए एक ऑफिस का उद्घाटन भी करना है।
माधव ने बात मान ली और सारी अधूरी चित्रकारी लेकर नैनीताल पहुंच गया। वहाँ उसने काफी अच्छे तरीके से अपने पिता के व्यवसाय को आगे बढ़ाया।कुछ दिन सामान्य सा चलता रहा।
फिर एक दिन उसी आँख वाली युवती की तस्वीर उसे स्पष्ट दिखाइ दी,जिसकी आकृति उसे पूरी नहीं दिखाई पड़ती थी। आज वही पूरी की पूरी उसकी आँखों में आ गई।धानी और पीले रंग की सलवार कुर्ती में।आधी रात में उठकर वह तस्वीर बनाने लगा। जैसे ही उसकी तस्वीर बनी उसने उसे दूसरे दिन सुबह में स्टूडियो में फ्रेम कराने के लिए दे दिया और अपनी माँ को कहा कि मैं जिस लड़की की अधूरी स्केच बनाता था आज उसकी पूरी तस्वीर बन गई है,मुझे अचानक उसकी पूरी आकृति नजर आयी माँ।फिर माधव ने वह तस्वीर अपनी माँ को भेज दी।वह तस्वीर काफी आकर्षक और खूबसूरत लड़की की बनी थी।
स्टूडियो वाले ने दूसरे ही दिन माधव को फ्रेम दे दिया और माधव ने उसे शॉप में लगा दिया।एक दिन कोई ग्राहक आया संगमरमर की खरीदारी करने के लिए। जैसे ही वह आया उसकी नजर उस युवती की तस्वीर पर पड़ी। उसने कहा यह तो राधिका है, इसकी तस्वीर आपके पास कैसे? वह तो करीब पंद्रह वर्षों से अपने पैरों पर खड़ी नहीं हुई और अभी एक सप्ताह पहले ही कोई विदेश के डॉक्टर आए हैं, जिन्होंने राधिका के कमर का ऑपरेशन किया क्योंकि राधिका का काफी बुरा एक्सीडेंट हो गया था और वह बेड पर हो गई थी। वह पंद्रह वर्षों से कहीं बाहर तक नहीं निकली फिर आपने उसकी तस्वीर कैसे बना दी ? माधव को बात बड़ा अजीब लगा। माधव नें उस खरीददार से कहा जरा चलिए मेरे साथ मेरे घर आपको दिखाता हूँ| ग्राहक माधव के घर पहुँचा माधव ने वह सारे स्केच जिसकी आँख और होंठ जो भी बनाया था सारी की सारी उसे दिखा दी।
अब उस ग्राहक की हैरानी की सीमा नहीं थी।उसने माधव से कहा कि आप हॉस्पिटल चलिए चार दिन पहले ही उसका ऑपरेशन हो गया है| अब वह अपने पैरों पर भली-भांति खड़ी हो पाती है।इधर माधव ने अपने माँ पिताजी को यह बात बताई और उसकी माँ पिताजी भी नैनीताल पहुंचे। जब सब एक साथ राधिका के पास पहुँचे तो सबको घोर आश्चर्य हुआ की माधव की बनाई हुई स्केच और राधिका में कोई अंतर ही नहीं था। हूबहू ऐसी ही तस्वीर थी लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि माधव तो रहता था जयपुर में और वहाँ उसकी तस्वीर बनाता था और यह नैनीताल में थी पिछले पंद्रह वर्षों से बेड पर।
अब माधव की माँ ने कहा जिसका स्केच उसका बेटा पंद्रह वर्षों से बना रहा था आज वह लड़की जब साक्षात मिली है तो उससे अपने बेटे का ब्याह करा अपने घर ले कर जाऊँगी,पहले धूम धाम से माधव और राधिका का विवाह होगा। माधव की माँ मन ही मन यह सब सोच कर मुस्कुराने लगी। फिर उसने यह प्रस्ताव सबके सामने रखी।
राधिका की घरवालों ने सोचा भी नहीं था कि यूं घर बैठे बैठे इतना अच्छा रिश्ता उनकी बेटी के लिए आ जाएगा।माधव के पिता को तो अपने बेटे की खुशी से बढ़कर कोई खुशी ही नहीं थी।सबने इस बात में सहमति दिखलाई।
राधिका को भी माधव बहुत पसंद आया और क्यों ना पसंद आए। किसी की तस्वीर बिना देखे जब इस तरह कोई बना सकता है अगर वह साथ में रहे तो उसकी कदर करेगा ही। फिर दोनों घरों में विवाह की तैयारी शुरू हो गई और एक निश्चित तिथि देखकर के उन दोनों की धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ।
विवाह के पश्चात सभी एक साथ रहने लगे। और तो और माधव को अब वो आकृति सपने में आनी बंद हो गई थी और काफी खुशहाल जीवन वह जीने लगे। माधव भी पूरी एकाग्रता के साथ अपने पिता के बिजनेस को एक मुकाम तक पहुंचा दिया।
— सविता सिंह मीरा
