मुक्तक/दोहा माँ *चंचल जैन 12/05/202513/05/2025 माँ की ममता न्यारी, स्नेहिल पावन माया। सपने बुनती नेहा, दुख में शीतल छाया। माँ खिलती फुलवारी, सौरभ नित छितराती~ माँ प्रभु परमात्मा सी, आँचल में सुख पाया।।