जगन्नाथ रथ यात्रा
चारों धामों में बहुत प्रसिद्ध एक जगन्नाथ धाम,
निकलती रथ यात्रा पुरी में बड़ी अद्भुत धूमधाम,
आषाढ शुक्ल द्वितीया तिथि को यह पर्व आया,
भक्तों ने जगन्नाथ प्रभु का जोर जयकारा लगाया ।
सब की पूरी करते मनोकामना नाथों के नाथ,
कृष्ण राधिका युगल स्वरूप ही है श्री जगन्नाथ,
भक्तों को दर्शन देने प्रभु गर्भ गृह से रथ में आते,
रास्ते में अपनी मौसी के घर भी है मिलने जाते ।
सच्चे भक्तों के जीवन में प्रभु कृपा से हो करिश्मा,
सर्वत्र गाई जाती हैं जगन्नाथ रथ यात्रा की महिमा,
श्री महाविष्णु का ही साक्षात है यह सुंदर अवतार,
भक्त प्रिय परमेश्वर प्रभु निकले रथ पर हो सवार ।
आस्था, विश्वास, श्रद्धा, प्रेम का पूर्ण कर समर्पण,
भक्त करते हैं प्रभु को अपना तन मन सब अर्पण,
मालपुआ का प्रसाद सभी भक्तों को है मिलता,
“आनंद” से हर भक्त जय हो जय जगन्नाथ कहता ।
काठ की मूरत में दिल धक धक धड़कता जादूगर,
हे जगन्नाथ ! सब पर रखना अपनी कृपा की नज़र,
भरपूर सुख समृद्धि स्वास्थ्य “आनंद” अपार देना,
हर भक्त की अर्जी जगन्नाथ स्वामी स्वीकार करना ।
— मोनिका डागा “आनंद”
