सावन आया
रिम-झिम, रिम-झिम सावन आया।
त्यौहारों का मौसम लाया।।
भक्ति भाव रम मन सुख पाया।
परमेश्वर गुण गान सुहाया।।
बूँदें बरसी झर-झर, झर-झर।
खिलते अंकुर सुंदर मनहर।।
मखमल-सी हरियाली सजती।
पावस ऋतु मनभावन लगती।।
जल धाराएँ कल-कल बहती।
आसपास हरियाली खिलती।।
हलधर मन हो हर्षित पुलकित।
डोले छम-छम बाली सुरभित।।
सावन की बौछारें गाती।
बूँदों की सरगम मन भाती।।
झूम-झूम मन नाचे गाये।
सुखदा मंगल खुशियां लाये।।
