हास्य व्यंग्य

व्यंग्य रचना : चोरों के नवाचार 

कई तरह के चोर होते हैं। कुछ चोर बौद्धिक होते हैं तो कुछ शारीरिक श्रम को महत्त्व देते हैं। कुछ अपनी मेहनत से अपने ही पास इक्कठी सामग्री की चोरी कर फ़र्रियाँ बनाते हैं और नई नई जगह छुपाकर परीक्षा देने पहुंचते हैं।

पर आज अखबार की तीन खबरों ने वाचाल मन को शांत किया।जो कि बहुत दिनों से व्याकुल था कि मानव तकनीक के आगे हार मान गया है और अपना प्राकृत चौरय कर्म नहीं कर रहा। वह भूल गया कि तकनीक तो अभी इक्कीसवीं सदी में आई है वह तो न जाने कितनी शताब्दियों पूर्व से चोरी में माहिर है। ताजमहल तक को उसने चोरी से बनाया है। शाहजहां ने जब बनाया होगा उसे तो उसने भी नहीं सोचा होगा कि कैसे बनवाएं? उसने यह कल्पना भी नहीं की होंगी कि इतनी सारी बेगमों,और अर्ध बेगमों (अर्थ समझें) के होते हुए भी एक ही बेगम की याद में मकबरा क्यों हो? वह तो धन्य हो अंग्रेजों का जिन्हें उसमें यह बातें नजर आई और उन्होंने इसे मोहब्बत का प्रतीक बनाकर एक तरह से अपने रक्तरंजित शासन में थोड़ी सी मानवीयता,वह भी मुगलों की बनाई चीजों की चोरी कर अपने फायदे के लिए की। जो भी मजबूत किले, सालारजंग हो या कोलकाता संग्रहालय सभी अंग्रेजों के नई दूसरे शासकों ने बनवाए। और तो और इन अंग्रेजों की कामचोरी भी ऐसी की एक भी महल,या किला कभी पहाड़ों अथवा खाइयों के बीच नहीं बनवा पाए। सारे हमारे ही राजपूतों,चोल, चालुक्यो,गुप्त और मौर्यवंश के ही काम में लिए। उनका काम ही यही था भारत की प्राकृतिक,उर्वरा भूमि संपदा को लूटना।चाहे रेशम, मसाले,हीरे मोती हो या हमारे प्राचीन स्थल। ताजमहल की चोरी भी मुगलों ने ऐसे की कि हमारी पुरातत्व महत्व के सिरोही के पास जैन मंदिर और छतरियां हो या फिर हो मध्यप्रदेश के खजुराहो,उज्जैन के प्राचीन महल, दक्षिण में हम्पी,मदुरै का मीनाक्षी मंदिर वहां के शिल्प की बारीकियों को लेकर ताजमहल बनाया। मध्य में याद आ गया तो ईरानी,अफगानी ढंग से भी चांद,तारे,फूल पत्तियां बना दी।उस चोरी के काम से बनी इमारत को जिसकी अस्सी प्रतिशत दीवारें कोरी पड़ी हैं ,आजादी के बाद के इतिहासकारों ने मोहब्बत की मिसाल बनाकर पेश किया। यह भी नहीं सोचा कि अनगिनत बीवियों और औरंगजेब जैसे अत्याचारी पुत्र ,जिसने शाहजहां को कैद में ही मरवा दिया का क्या वास्ता इस मकबरे से? 

    तकनीक से चोरी की खबर थी कि शर्ट के बटन में डिवाइस थी और पास में कार में सेटअप लिए बैठा बंदा पेपर हल करवाता। चोरी पर इतनी मेहनत से? सोचो पेपर हाथ में आया,फिर प्रश्न पढ़े जाएं परीक्षा भवन के पूर्ण शांत माहौल में।वह भी एक नहीं पचास वह भी विकल्प सहित।फिर वह उत्तर बताए बाहर वाला सोचो जहां एक मिनिट से भी कम में प्रश्न हल करना होता है वहां इस सारी क्रिया में प्रश्न ही तीन मिनट में हल होता वह भी यदि बाहर वाला खुद होशियार होता। दूसरा पीछे बैठा तो और भी होशियार वह अंदाजे से पर्चियां बना लाया और वह भी मोजे के नीचे। अब इतना होशियार होता कि भांप जाता यह प्रश्न आएंगे तो वैसे ही हल कर लेता।तो तुक्के मारे।एक दो दिखे तो अब उनके उत्तर के लिए तीसरी बार वॉशरूम गया। इस बार दो मिनिट बाद दबे पांव परीक्षक भी गया और वहां रंगे हाथों यह और दो और पकड़े। सभी की जेब से सारे नोट अपने पास लेकर परीक्षक ने त्वरित न्याय किया।साथ ही तीनो का भविष्य बर्बाद होने से बचा लिया। 

मैंने गौर किया कि चोरों की सोच मजबूरी और मनोविज्ञान क्या होता है एक घर में चोरी करने घुसना इतनाआसान नहीं होता। हिम्मत लगती है ,शक्ति लगती है और सबसे जरूरी बात अनुकूल समय देखा जाता है। कोई घुसते देख ले तो आपको मार मार के लाल कर दे। यह कोई सैफ अली खान का घर थोड़े ही है कि आधी रात को चोर छुपा मिल जाए तो उससे बातचीत की जाती है फिर नेगोशिएट होता है कि यहां यहां और धीरे धीरे मारना। फिर सारा मामला निपटाकर खुद ही ऑटो में अस्पताल निकलना पड़ता है।इतने सारे बचकाने कर्म तो चोर ने भी नहीं सोचे होंगे। ऊपर से हमारे मोहल्ले के टुच्चे लोगों तक के यहां सीसी टीवी कैमरे और वहां बड़े लोगों की बिल्डिंग तक में पीछे और दाएं बाएं अंदर कोई कैमरा नहीं ? मानो चोर को साथ ही अंदर लेकर गए और उसे टाइम टेबल दिया कि इतने बजे यह यह करना है।

 दूसरे चोर सोचते होंगे कोई अपुन से भी मांडवली में यह काम करवाले।

ऐसा बावला हुआ कि यह भी भूल गया कि चोरी का उद्देश्य दिखाना था तो इतनी देर में कुछ तो उल्टा पुल्टा किया होता। पर नहीं सब गोविंदा के अपने रिवॉल्वर से अपने ही ऊपर फायर करने जैसा मासूम काम निकला।अभी देखना दो चार और आएंगे जिनकी कार में,जिम में,बेडरूम में कोई घुसा होगा और उन्हीं के एक्शन बोलने पर काम करेगा। फिर यह सुरक्षित उसे निकलने का रास्ता भी देंगे,वह भी सी सी टीवी कैमरों वाला।

तो चोरी करना बहुत खतरनाक काम है पर सड़क पार करने से जितना नहीं। क्योंकि वहां तो कब, कोई सी भी तेज,कानफोडू आवाज की बाइक पलक झपकते ही आपको उड़ा देगी। उससे बचकर निकले तो बिना आवाज किए तेज रफ्तार से आती कारें आपको ईश्वर के पास पहुंचा देंगी।

आजकल एक चोरी रोज हो रही की कोई कविता की पंक्तियां या पूरी कविता ही ले उड़ें (यह कविता शब्दों की है नारी न समझना) और उसे अपने नाम से फेस बुक पर लगा दे। शाम तक दस अन्य लोग हमारी कविता है का दावा कर दें।अब सच्चा कौन? यह तो कविता ही बताएगी। वह बताती भी है जब आगामी दिनों में कोई सिरफिरा महादेवी वर्मा,नीरज या शिवओम अम्बर की मूल पंक्तियां ढूंढकर वहीं पोस्ट कर देता है। तब वह दस दावेदार पता नहीं कहां गायब ?

  एक नवाचार टीवी एंकर,संपादक रोज करते हैं,न्यूज चोरी।किसी चैनल पर रिपोर्ट चली कि हरियाणा,महाराष्ट्र में बीजेपी हार रही तो दोपहर और शाम तक उसकी काट में बीजेपी जीत रही के इतने आंकड़े आ जाते हैं कि गिनना मुश्किल।और दोनों ही नकली।

ऊपर से एंकर का इतना आत्मविश्वास की लाइव कैमरे के सामने झूठ का अंबार खड़ा कर रहा।प्रवक्ता भी पूरी जिम्मेदारी के साथ झूठ को सच की तरह बोल रहा। चार्वाक होते तो आज अपने वंशजों को देख गर्व करते।

      आजकल रुपए की चोरी नहीं गिनी जाती क्योंकि रुपए का अवमूल्यन हो चुका है।आज तो चोर घर में घुसकर पहले रसोई और फ्रिज देखता है। फिर वहां से केक,पिज्जा,मिठाई खाता है। फिर मोबाइल फोन ढूंढता है।बेटी और पत्नी के लिए दो तीन क्रीम और एक चोर तो नीकैप,घुटने के दर्द का स्प्रे भी ले गया।

  वह दिन हवा हुए जब रोटी लिए भागते हुए लड़का या आदमी देखते थे अब तो पूरा का पूरा एटीएम ही उखाड़ ले जाते हैं।भले ही एटीएम गार्ड,कैश भरने वाली वैन,लुहार जो भारी चेन और हुक बनाता है और फिर बड़ी जीप या गाड़ी तब चोरी होती है।ऊपर से सीसी टीवी का ध्यान रखना। फिर किस रस्ते से कैसे निकलेंगे इसकी पूरी जानकारी करके एक चोरी की जाती है। और अक्सर दूसरे की बेवकूफी से चोरी का पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन बनाने वाला पकड़ा जाता है।फिर सदाबहार सारा इल्जाम उसी के सिर। इतनी मेहनत वह करें उससे अच्छा यह नहीं कि आराम से दिल्ली की सीमाओं पर झुग्गी डाल फ्री बिजली,शिक्षा, राशन,पानी कर लेते? 

वैसे बिजली तो सरकार खंभे बिछाएं या नहीं पर यदि दूर रोड से भी लाइन जा रही है तो वह भारत की बिजली भारतवासी के काम आ ही जाती है। कैसे? जो लाइन सरकारी इंजीनियर और बीस मजूदरों के साथ सालों नहीं खिंचती वह लाइन केवल दो से तीन घंटे में हमारे ग्रामीण भाई आराम से खींच लेते हैं। आखिर गांव से भी तो नेता,अफसर कैसे बनेंगे ? 

 चोर वह ही नहीं होता जो दिखता है।वह भी है जो नहीं दिखता स्टॉक मार्केट कल तक तिरयासी हजार था जो आज छिहत्तर हजार पर आ गया और पांच लाख करोड़ रुपया गायब। कहां गया? ऐसी भी चोरियां माफी कहें या नजरअंदाज के काबिल भी होती हैं। घर के बुजुर्ग का रसोई में चुपके से मीठा खा लेना,फ्रिज से बाई का संतरे का जूस पीकर उतना ही पानी मिला देना या फिर स्कूल में दूसरे की कॉपी से अगले पीरियड के पहले होमवर्क उतार लेना। और महिलाएं इसमें माहिर होती हैं कि यह जो गपागप समोसे खाता दो फीट का बच्चा दिख रहा है यह अभी तीन साल का ही है तो इसका किराया नहीं बनता। न ट्रेन,बस में न सिनेमा हॉल में। अब कुछ चोरियां ऐसी जो सदा नवाचार ही रहतीं हैं फिर चाहे वह पुत्र द्वारा घर से कुछ रुपए निकालने हो या फिर भाई द्वारा दूसरे भाई की शर्ट और बाइक ले जाना हो। पत्नी द्वारा हर माह खर्च में से कुछ चुराकर बचाना और उसे ही आड़े वक्त में बच्चों की मदद के लिए दे देना। 

और आंखों से दिल चुराना…….. …  

छोटे बच्चे का टॉफी चुराना और  

मौत से आंख मिचौली खेलना 

क्या चोरी मानी जाएगी ?

— डॉ. संदीप अवस्थी

डॉ. संदीप अवस्थी

कथाकार,कवि 804,विजय सरिता एनक्लेव बी ब्लॉक पंचशील,अजमेर,305001 7737407061