त्यौहारों की शुरुआत श्रावणी से ही हो जाती है
सावन माह सभी सनातनियों के लिये खुशी लेकर आता है। आज तो इस उम्र में उत्साह में अवश्य ही कमी आयी है। अतः बाहर जाना तो हो ही नहीं पाता है लेकिन, बचपन से चालीस पचास उम्र तक की याद करते ही मन खुशी से भर जाता है। हां यह अवश्य ध्यान रखता हूँ कि परिवार के सभी बच्चे हों या बड़े श्रावण महीने का पूरा आनन्द उठा लें । इसलिये सभी को बैठे बैठे प्रोत्साहित करता हूँ । श्रावण महीने में घर में स्थापित शिवलिंग पर सभी सबेरे सबेरे नहाने के पश्चात आसन पर बैठ जल अर्पण अवश्य करें इसका ध्यान रख, सभी इसकी पालना करें, यह निश्चित करता हूँ ।
श्रावण माह में बहुत त्यौहार आते हैं वो सभी पूरे उत्साह व उमंग से मनाये जायें इस ओर ही मेरा प्रयास रहता है। तालाब पानी से लबालब भरे रहते हैं। अतः सभी को छूट्टी में किसी न किसी तालाब के किनारे गोठ के लिये पहले से ही योजना बना लेने का तगादा कर, योजना तैयार करवा कर, उस दिन सभी साज सामान के साथ भेजने की व्यवस्था कर भेज देता हूँ ।
इसी तरह इस माह में पड़ने वाले सभी तीज-त्योहार पूरे उत्साह से सम्पन्न हो उस ओर भी पुत्र-पुत्री, वधुओं के साथ विचार-विमर्श पहले से ही कर, तय समय पर बढ़िया ढंग से सम्पन्न करवाने की जिम्मेदारी निभा लेने की लालसा रहती है।
श्रावण महीने में पन्द्रह दिनों तक मन्दिरों में झूलनोत्सव मनाया जाता है। झूलनोत्सव में भगवान का नित्य नया श्रृंगार किया जाता है। एक तरह से सभी मन्दिरों में प्रतिस्पर्धा सी चलती है। नित्य नये नये पकवान का भोग भी धराया जाता है। इसलिये मेरा प्रयास यही रहता है कि सभी बच्चे संध्या पश्चात परिवार के बड़े समझदार सदस्य के साथ मन्दिर अवलोकनार्थ जांय । घर लौटने पर मैं उनसे विस्तार से बताने को कहता हूं ताकि मेरा तो मन बहले ही साथ ही साथ उनमें भी अपनी संस्कृति की समझ बढ़े।
इसके अलावा सभी छोटे-बड़े सदस्यों को श्रावण महीने में पड़ने वाले एक सोमवार को व्रत कर लेना है इस ओर मैं पूरा पूरा प्रयास कर, सभी से यह कृत्य भी करवा लेता हूं।
उपरोक्त के अलावा भी श्रावण माह में पड़ने वाले बहुत से त्यौहार/ उत्सव सामाजिक तौर पर पूरे उत्साह से सामूहिक मनाये जाते हैं।आप सभी की जानकारी के लिये यहां दो विशेष त्यौहार के बारे में संक्षेप में जानकारी सांझा कर रहा हूं –
सामूहिक तौर पर मनाये जाने वाले त्यौहार में नाग पंचमी एक प्रमुख उत्सव है। यह उत्सव विशेषकर गाँवों में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। वाकायदा जीवित नाग की पूजा की जाती है। उस दिन औरतें उपवास भी रखती हैं।
दूसरा त्यौहार है रक्षाबन्धन। यह त्यौहार भाई-बहनों के पवित्र रिश्ते को दर्शाता है। वैसे तो इस दिन साधारणतया बहनें अपने भाइयों को रक्षासूत्र बाँधती हैं। लेकिन अनेकों जगह पर शिक्षक भी अपने शिष्यों को रक्षासूत्र के माध्यम से ज्ञान परम्परा का निर्वहन करते हैं।इसी तरह पुरोहित (धार्मिक) भी समाज से रक्षा का संकल्प, रक्षासूत्र बाँध पूरा करते हैं। इस दिन साधारणतया श्रावणी कार्यक्रम होता है। यहां श्रावणी कार्यक्रम से मतलब है पवित्र नदियों व तीर्थ के तट पर आत्मशुद्धि का उत्सव। इस कर्म में आंतरिक व बाह्य शुद्धि गाय का गोबर, मिट्टी, भस्म, अपामार्ग, दूर्बा, कुशा एवं मंत्रों द्वारा की जाती है।इसलिए जो लोग जनेऊ धारण करते हैं वे श्रावणी पूर्णिमा के दिन धर्मावलंबी मन, वचन और कर्म की पवित्रता का सकंल्प लेकर जनेऊ बदलते हैं। प्रायः इस दिन जनेऊ के अनेक जोड़ों या कहिये दो तीन बण्डलों की पूजा कर रख लेते हैं और पूरे वर्ष में जब भी जनेऊ बदलना होता है तो इनमें से ही निकाल उपयोग कर लिया जाता है।अगले माह पड़ने वाले जन्माष्टमी की तैयारी भी प्रायः प्रायः आज के दिन से ही शुरू हो जाती है।
ऊपर उल्लिखित तथ्यों से यह स्पष्ट है कि श्रावण माह से त्यौहारों की शुरुआत हो जाती है। इसलिये ही यह माह सभी को आनन्ददायक ही नहीं करता बल्कि आने वाले त्यौहारों को धूमधाम से मना लेने के लिये प्रेरित भी करता है।
— गोवर्द्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’
