मेरा भारत महान
मेरे महान भारत देश में–
हर प्रदेश की अपनी इक शान है ,
अपनी भाषा है, अपनी संस्कृति है,
अपनी वेशभूषा,अपनी भाषा से पहचान है,
पर मेरी यह दिव्य भूमि,
इन सब में सबसे ‘महान’ है,
देवो और ऋषियों का इस धरती पर है वास
यही है हमारे भारत का ” दिव्य प्रकाश”
जो सभी को स्वीकार्य है सच्चे मन से,
यही है मेरे भारत का “भव्य विकास”
यहां सत्य है, धर्म है,ज्ञान है,
यहां प्रभु का पूर्ण आशीर्वाद है,
गंगा की धारा में प्यार यहाँ बहता है,
ईश्वर की भक्ति में जन मानस-
तन मन धन से उमड़ा रहता है,
सत्य की खोज में विश्व यहाँ आता है.
गीता और वेदों में अथाह ज्ञान पाता है,
अतिथि हमारे लिए देवता सामान है ,
विश्व में हमारी इसी से पहचान है,
जहाँ अहंकार है वहां अंधकार है ,
यहाँ ज्ञान है यहाँ ज्योति है,
जहाँ द्वेष है वहां क्लेश है–
यहाँ लगन है यहाँ प्रीति है,
जहाँ कुमति है वहां दुर्गति है ,
यहाँ सुमति है यहाँ सम्पति है,
गुरु के चरणों हमारा स्थान है,
गुरु में ही विद्या विद्यमान है,
गुरु से ही ईश्वर की पहचान है,
यही हमारी संस्कृति की शान है,
हिमालय की गोद में हमारा निवास है,
जो सभी को स्वीकार्य सच्चे मन से,
इसी से हमारे भारत का “दिव्य प्रकाश” है ,
इस दिव्य भूमि कि मर्यादा में हम सब की आन है,
देश की विविधता ही हमारे महान भारत की शान है,
— जय प्रकाश भाटिया
