कांवड़ में लादकर आत्मा बेच दोगे?
जो शिक्षा से जले, वही सरकार में बैठे हैं,
यही कारण है कि स्कूल अब श्मशान जैसे हैं।
ये कौन लोग हैं जो शिव के नाम पे नाचे हैं,
नशे में धुत्त, फिर भी खुद को भक्त बताते हैं।
एक बच्चा मरा है ‘श्रद्धा’ के नाम पर,
और शासन ने उसे ‘बलिदान’ बताया है।
किताबें राख हो गईं, मंदिरों के लाउडस्पीकरों में,
और सवाल अब देशद्रोह कहलाने लगे हैं।
क्या ऐसे ही तुम “विश्वगुरु” बनोगे?
या कांवड़ में लादकर आत्मा बेच दोगे?
— डॉ सत्यवान सौरभ
