कविता

काश, एक बहन होती

राखी आई, पर कुछ जीवन मे अधूरा है,
ना कोई आवाज़, ना कोई झगड़ा प्यारा है।
कलाई तो है, पर वो रक्षा का धागा नहीं,
जिसमें स्नेह भरा हो, वो नाता नहीं है।

बचपन से देखा है सबको एकसाथ हँसते,
बहनों को चिढ़ाते, फिर गले लग जाते।
मैं बस दूर खड़ा मुस्कुराया करता,
मन में एक करुणा सा सवाल दबाया…..

काश, एक चुलबुली सी बहन होती मेरी भी,
जो रूठती, लड़ती पर फिर सबसे ज्यादा चाहती।
जो कहती भैया, तुम दुनिया से लड़ लेना,
पर मुझे कभी तुम अकेला मत छोड़ देना।…..

आज जब सबके हाथों में राखियाँ होती हैं,
मेरे हाथों में बस यादें हैं कुछ चाहतें होती है,
कुछ अधूरी अनकही कहानियाँ होती हैं।

पर अब मैंने सीखा लिया है ये भी जीना,
दूसरों की बहनों में अपनी बहन को देख लेना।
उनकी रक्षा कर उस ख़ालीपन को भर लेना,
जो कभी एक रिश्ते के नाम था बहन उसको निभा लेना।

— रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com