हैपी बर्थडे टू मी !
रीता जी एक बैंक में कैशियर के पद पर कार्यरत हैं। पतिदेव एक मल्टीनेशन कंपनी में जनरल मैनेजर है । दो बच्चे है बेटा बीटेक कर रहा है फाइनल ईयर में है और बेटी एमबीए की डिग्री हासिल कर एक कंपनी में एचआर एक्जीक्यूटिव के तौर पर काम करना शुरू की थी।
रीता का कल 50वा बर्थडे है। बच्चे और पतिदेव ने पूछा बोलो क्या चाहिए।
रीता ने कहा मुझे उस दिन तुम लोगों का थोड़ा सा समय चाहिए। बच्चों ने कहा क्या मम्मी आप तो फिलासफी झाड़ देती है हर बात में। अरे समय क्या गिफ्ट है? हम सब आप के पास ही तो रहते हैं तो ये क्या बात हुई? गिफ्ट में समय चाहिए। हालाकि पतिदेव ने चुप्पी साध ली इस विवाद में। उन्हे लगा कही बात बढ़ कर कलह का रूप ना ले ले। क्यूं की वो भी रीता को समय नहीं दे पाते थे ऑफिस के कामों में उलझ कर।
रीता ने कहा पास रहते हो लेकिन साथ नही मिलता है तुम सब का। और वैसे भी आज के समय में किसी को दिया हुआ समय उसको दिया हुआ सबसे अच्छा गिफ्ट होता है। व्यति उन बीते पलो को याद कर जीवन भर मुस्कुराता है। और कभी भी उन पलों को अपने जीवन से अलग नहीं कर पाता है। इस लिए किसी को दिया गया समय उस व्यक्ति को दिया गया सबसे अच्छा उपहार है। मुझे जो चाहिए था बोल दिया देना ना देना तुम लोगों की मर्जी। कल सब सुबह की चाय मेरे साथ पीना थोड़ा जल्दी उठ जाना सब लोग ऐसा बोल कर रीता जी उठ गई और अपनी दैनिक दिनचर्या में लग गई।
रीता जी के उठते ही सब अपने अपने रूटीन में लग गए। अगले दिन रीता जी उठी तो देखा सब के सब लोग सो रहे थे। पति बेटा और बेटी किसी को भी याद नहीं रहा रीता जी की समय वाली बात।
रीता को देख कर दुःख तो बहुत हुआ की किसी को भी उनके जन्मदिन के दिन उनका मन रखने के लिए ही सही उनके साथ चाय पीने की फुर्सत नही मिली या कहें किसी ने कोई प्रयास नहीं किया। लेकिन अब जो है सो है। हमेशा से ऐसा ही होता आया था। कभी कोई छोटी सी फरमाइश अगर किया है उन्होंने तो परिवार ने कोई तव्वज्जो नहीं दिया। हां कोई सामान मांगा होगा तो दोनो बच्चे ऑनलाइन प्लेटफार्म पर ढूंढ कर ऑर्डर कर ही दम लेते थे। लेकिन रीता जी को भावनात्मक लगाव की चाहत हमेशा से रही की वह चुप हों तो बच्चे उनसे पूछे क्या हुआ या पति आ कर उन्हे अपना दिन भर का हाल चाल बताए उसका हाल चाल पूछे।
रीता जी ने मन ही मन कुछ निश्चय किया और आईने के सामने खड़े हो कर खुद पर एक भर पूर नज़र डाली। और फिर मुस्करा कर बोली “हैपी बर्थडे टू मी ” । फिर अपनी मन पसंद पुदीने अदरख की गुड़ वाली चाय बनाई और बालकनी में कुर्सी पर बैठ कर पीने लगी।
आम तौर पर रोज़ वह सबको चाय के लिए जगाती थी किंतु आज उन्होंने किसी को नही जगाया हां सबकी चाय बना कर रख दी थी चाय पीते पीते वह यह भी सोच रही थीं की आज का दिन कैसे मनाया जाए।
फिर उन्होंने अपना रूटीन काम निपटाया और खूब अच्छे से तैयार हो कर ऑफिस के लिए निकलने ही वाली थी की पति बेटा और बेटी सब उठ गए सबने उन्हे विश किया लेकिन सबकी आंखों में ये प्रश्न था की रीता जी ने उन्हे जगाया क्यूं नहीं।
लेकिन रीता जी ने तो मन ही मन कुछ निश्चय कर लिया था की उन्हे अपनी खुशियां खुद में तलाशनी है।
उन्होंने अपने आप को अपना ही एक नया वर्जन गिफ्ट किया था। यानी एक सेल्फ मोटिवेटड रीता जो खुश रहने के लिए किसी के साथ की मोहताज नहीं है।जो किसी से कोई अपेक्षा नहीं रखती है। जिसको पता है कि उसे क्या करना है आदि आदि।
शाम को सब लोग समय से थोड़ा जल्दी घर पहुंच चुके थे।पतिदेव केक लेकर आए थे । सब ने रीता को बुलाया केक काटने के लिए। रीता ने भी कोई विरोध नहीं किया । केक काट कर सब ने कहा खाना खाने बाहर चलते है रीता ने कहा हमने खाना बना लिया है इस लिए बाहर जाने की कोई बात नही है आओ सब मिल कर खाते हैं। खाना पीना हो गया सब लोग सोने गए । अगले दिन पतिदेव ने सुबह सुबह चाय बना कर रीता को जगाया । जैसे ही चाय पीने दोनो पति पत्नी बैठे दोनो बच्चे भी अपना अपना कप पकड़े शामिल हो गए आज बिना कहे सब लोग रीता के साथ चाय पी रहे थे और क्वालिटी टाइम बिता रहे थे। रीता भी सुखद आश्चर्य में पड़ गई थी। की परिवार वाले इतने सालों से उठाने पर भी नही उठते थे और आज देखो अपने आप सब कुछ ठीक वैसा ही हो रहा है जैसा वो चाहती थी। बस अंतर इतना था की अब उसने मांगना बंद कर दिया था। तो सब कुछ अपने आप उसके पास आ गया। आज रीता ने इस रहस्य को जान लिया था कि अपनी खुशियों किसके लिए किसी के भी मोहताज मत रहो फिर देखो कैसी शांति मिलती है। और वो खुशियां खुद चल कर आप के पास आती हैं।
— प्रज्ञा पांडेय मनु
