सूरज लड़ रहा है
सूरज अकेले तूफानी बादलों से
दृढ़ संकल्प और कर्तव्य बोध लेकर
अदम्य साहस और आत्मविश्वास लेकर
भेद रही हैं किरणें बादलों को
मद्धिम रोशनी व्याप्त है
क्रोध में गरजे,घुमड़े हठी बादल
आखिर कितनी देर तक
क्षत-विक्षत बादल छँटने लगे
घुटने टेक दिए आत्मविश्वास के आगे
थकित बदन,विजयी मुस्कान,
सूरज निकला धीरे-धीरे।
— गीता लिम्बू
