लघुकथा – देशभक्ति
स्वतंत्रता दिवस का समारोह सम्पन्न हो गया। अगले दिन सुबह की सैर के लिये जाते हुये राजीव ने देखा कि एक बच्चा इधर-उधर पड़े तिरंगों को एकत्र कर रहा था। वह रुके और पूछा,” बेटा! तुम इतने सारे झंडों का क्या करोगे? पंद्रह अगस्त तो बीत गया।”
बच्चे ने कहा,”सर! पंद्रह अगस्त बीत गया पर आज भी हम आजाद हैं न? कोई इन झंडों को पैरों तले न कुचले इसलिये उठा रहा हूँ। मैं भी स्वतंत्र भारत में रहना चाहता हूँ।”
— डाॅ अनीता पंडा ‘अन्वी’
