कविता

हर घर तिरंगा

मान भी स्वाभिमान भी पहचान अपनी है तिरंगा,
शान से ईमान से मुस्कान से लहराऍं हर घर तिरंगा ।

केसरिया रंग नस-नस में शौर्य है घोले,
सफ़ेद रंग शांति व प्रेम की बात है बोले,
हरा रंग विकास की स्वर्णिम राह खोलें,
अशोक चक्र समय के संग-संग में डोले,
अपनी अभिव्यक्ति तेजस्विता का प्रतीक है तिरंगा,
शान से ईमान से मुस्कान से लहराऍं हर घर तिरंगा ।

पराक्रमी वीरों का विजय गान स्वर संवाद ये,
बलिदानी सैनिकों के रक्त का जोशीला नाद ये,
दुश्मनों की हर हार का गौरवान्वित अनुवाद ये,
देशप्रेमियों की एकता “आंनद” का आल्हाद ये,
स्वर्णिम स्वतंत्रता की लयबद्धता का राग है तिरंगा,
शान से ईमान से मुस्कान से लहराऍं हर घर तिरंगा ।

मान भी स्वाभिमान भी पहचान अपनी है तिरंगा,
शान से ईमान से मुस्कान से लहराऍं हर घर तिरंगा ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु