खूबसूरती का अक्स
हर बात पर तू ना इतराया कर,
अच्छा नहीं, संभल जाया कर।
माना “खूबसूरती” तेरा शस्त्र है,
कितने अजीबो-गरीब ‘वस्त्र’ है।
बस, इतना ही हैं तेरा आकर्षण,
क्यों, देखें दुनिया तुझे हर क्षण।
जरा नजरों को भी झुकाया कर,
अदब का लहज़ा अपनाया कर।
होठों पे मिठास कभी लाया कर,
मिशरी की तरह घूल जाया कर।
तब तेरी खूबसूरती का अक्स है,
ज़हां कहेगा वाह क्या?शख्स है।
— संजय एम तराणेकर
