कविता

इन वादियों को देखो

इन वादियों को देखो
जहां चारों तरफ मौसम रंगीन है
इन खेतों को देखो
जो हरे हरे चादर ओढ़ा है
इन पहाड़ों को देखो
जहां ठंडी ठंडी हवा झूमते
इन झरनों को देखो
जहां कल कल करती है पानी
इन बदलो को देखो
इससे वारिस की उम्मीदें होती
इस पूरी प्रकृति को देखो
जैसे नई नवेली दुल्हन सजी
सबके मन को मोह लेती।

— विजया लक्ष्मी

*विजया लक्ष्मी

बिजया लक्ष्मी (स्नातकोत्तर छात्रा) पता -चेनारी रोहतास सासाराम बिहार।