कविता

विश्वास

भागदौड़ की इस दुनिया में,
अब वक़्त नहीं अपनेपन का,
हर रिश्ता बस ज़रूरत से जुड़ा,
एहसास है अधूरेपन का।
विश्वास के सहारे जीते हैं,
मगर जब टूटता है भरोसा,
साँस तो चलती रहती है,
पर दिल फिर नहीं है सँभलता।
अति- विश्वास के नतीजे से,
इंसाँ भीतर से टूटता है अक्सर,
जो सच्चे दिल से निभाएँ वादे,
वो ही तो अपने होते हैं।

— मुनीष भाटिया

मुनीष भाटिया

जन्म स्थान : यमुनानगर (हरियाणा) उपलब्धियां: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख एवं कविताएँ I प्रकाशन: चार कविता संग्रह एवं तीन निबंध संग्रह, तीन quote बुक्स राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की दस हजार से अधिक पत्र पत्रिकाओं में वर्ष 1989 से निरंतर प्रकाशन I 5376, एरोसिटी, ऍफ़ ब्लाक, मोहाली -पंजाब M-7027120349 munishbhatia122@gmail.com